किसान एकता संघ में दो गुट, आहत पदाधिकारियों ने संगठन छोड़ा

ग्रेटर नोएडा। किसान एकता संघ में विवाद बढ़ने के बाद कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है, आरोप है कि संगठन में एक पदों पर दो-दो पदाधिकारी बनाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन के साथ धोखा किया है। प्रेस वार्ता में संगठन के राष्ट्रीय महासचिव बृजेश भाटी ने कहा कि संगठन की स्थापना के समय मुझे राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था, लेकिन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने फर्जी तरीके से अपने निजी रिश्तेदार को कागजों में राष्ट्रीय महासचिव बनाया अपने ही परिवार के रमेशचंद्र को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया संगठन द्वारा विवो कंपनी पर किए गए आंदोलन को रुकवाने के लिए कंपनी मैनेजमेंट से सांठगांठ कर रुपए और बसों की पार्किंग का ठेका लेने के लिए आंदोलन को रोकना चाहा, लेकिन वरिष्ठ पदाधिकारी और जिला कार्यकारिणी की सूझबूझ से आंदोलन को नहीं रोक पाए और आंदोलन को दलाली से बचा लिया। इस संबंध में प्रदेश मीडिया प्रभारी आलोक नागर ने बताया की अपने निजी हितों के लिए संगठन का इस्तेमाल किया जा रहा था, प्राधिकरण में फर्जी तरीके से अपनी बैकलीज के लिए प्राधिकरण पर दबाव बनाया जा रहा था। अपनी बैकलीज के लिए भोले-भाले किसानों को मोहरा बनाया जा रहा है। संगठन के जिलाध्यक्ष कृष्ण नागर ने कहा कि जब जिला कार्यकारिणी ने दलाली को रोकना चाहा तो फर्जी तरीके से पदाधिकारियों के फर्जी साइन कर जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया। किसान एकता संघ से आहत दर्जनों पदाधिकारियों ने संगठन से इस्तीफा दे दिया, जिसमें मुख्य रुप से बृजेश भाटी, राजेंद्र नागर, प्रताप नागर, आलोक नागर, जयवीर नागर, लोकेश भाटी, डॉ. विकास जतन प्रधान, दिनेश्वर दयाल, ऋषि पाल कसाना, कृष्ण नागर, अहलकार प्रधान, राकेश नागर, रफीक कुरैशी, प्रमोद नागर, सुनील भाटी, सीपी सोलंकी, संजय नागर सौरभ वर्मा जाहिद कुरैशी आदि लोग मौजूद रहे।

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