एनआईईटी में एंटीबॉयटिक प्रतिरोध- कारण एवं डिजिटल भारत में भविष्य की चुनौतियां

एनआईईटी में एंटीबॉयटिक प्रतिरोध- कारण एवं डिजिटल भारत में भविष्य की चुनौतियां

ग्रेटर नोएडा,10 सितम्बर। एनआईइटी (फार्मेसी इंस्टिट्यूट) ने एआईसीइटी प्रायोजित ई-कांफ्रेंस “एंटीबॉयटिक प्रतिरोध: कारण एवं डिजिटल भारत में भविष्य की चुनौतियां” विषय पर आयोजित की गयी। फार्मेसी इंस्टिट्यूट के निदेशक डॉक्टर अविजित मज़ूमदार ने सभी उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत किया एवं ड्रग प्रतिरोध के मुख्य कारणों पर प्रकाश डाला। डॉक्टर विनोद एम. कापसे, निदेशक, एनआईइटी एवं डॉक्टर प्रवीण सोनेजा, प्रबंध निदेशक, एनआईइटी ने भी सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। कॉन्फेरेन्स के आरंभिक सत्र में डॉक्टर शैलेन्द्र सर्राफ, उपाध्यक्ष, पीसीआई की गरिमामय उपस्थिति रही एवं उन्होंने कोरोना संक्रमण के संकट काल में एंटी बायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होने से रोकने के लिए फार्मसिस्ट के योगदान को बताया एवं साथ में उम्मीद जताई की भारत सरकार इस बारे में आवश्यक निर्णय लेगी। इस बारे में उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में संचालित शोध संस्थानों की सार्थकता को भी समझाया। डॉक्टर अतुल नासा, डिप्टी ड्रग कंट्रोलर, भारत सरकार ने भारत सरकार द्वारा एंटी बायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होने से रोकने के लिए उठाये गए कदमों के बारे बताया एवं साथ ही में इस तरह की कांफ्रेंस के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत डॉक्टर विजय भल्ला ने एंटी बायोटिक प्रतिरोध पर फार्मसिस्ट का दृश्टिकोण विषय पर व्याख्यान दिया एवं विभिन्न प्रकार के संक्रमण को रोकने के लिए सामुदायिक फार्मासिस्ट की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम सभी को धन्यवाद के साथ संपन्न हुआ।

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