नेताजी द्वारा निर्वासन में गठित सरकार की 77वीं वर्षगाँठ, इसकी विरासत, लाल किला परिक्षण और स्वतंत्रता विषय पर संगोष्ठी

नेताजी द्वारा निर्वासन में गठित सरकार की 77वीं वर्षगाँठ, इसकी विरासत, लाल किला परिक्षण और स्वतंत्रता विषय पर संगोष्ठी

ग्रेटर नोएडा,22 अक्टूबर। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ लॉ जस्टिस एंड गवर्नेंस और कैंपस लॉ सेंटर,दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में नेताजी द्वारा निर्वासन में गठित सरकार की 77वीं वर्षगाँठ, इसकी विरासत, लाल किला परीक्षण और स्वतंत्रता विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। इस वेबिनार का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढांचे के अंतर्गत निर्वासन में सरकार के मुद्दे पर विचार-विमर्श करना रहा, जिसका विशेष सन्दर्भ नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा 1943 में निर्वासित भारत की अनंतिम सरकार के साथ भारत को ग्रेट ब्रिटेन के औपनिवेशिक चंगुल से निकालना रहा। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारम्भ कार्यक्रम के कन्वीनर तथा स्कूल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अक्षय कुमार द्वारा किया गया, जिसमें उन्होनें कार्यक्रम के मुख्य विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की कनवीनर तथा स्कूल की विभागाध्यक्ष डॉ. ममता शर्मा द्वारा स्वागत वक्तव्य दिया गया, जिसमें उन्होंने सभी विद्वतजनों का स्वागत किया और उनका परिचय दिया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए स्कूल के डीन प्रो.(डॉ.) एस. के.सिंह ने विषय से सम्बंधित अपने वक्तव्य में कहा कि नेताजी हमारे असली नायक हैं तथा नेताजी की सक्रियता के कारण अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्रों ने उनके बारे में बहुत कम पढ़ा है। इसके उपरांत गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.भगवती प्रकाश शर्मा ने अध्यक्षीय भाषण में अपनी बात रखते हुए भारतीय इतिहास के ज्ञान और तथ्यों पर विहंगम दृष्टि से प्रकाश डाला और कहा कि आईएनए ने देश की जनता को जागृत करने में प्रमुख भूमिका निभाई और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका पर पुनः विचार करने की आवश्यकता है जिससे की नेताजी भारत में हर युवा के प्रेरणास्रोत बनें। कार्यक्रम के बीज वक्ता के रूप में अनुज धर, प्रसिद्द विद्वान् और लेखक ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए नेताजी को विशेष मानवीय दृष्टिकोण से ओत प्रोत बताया और उनके बारे में कम प्रसिद्द ऐतिहासिक तथ्यों से परिचित करवाया। साथ ही उन्होनें नेताजी की प्रशंसा करते हुए बताया कि अपने समय में उन्होंने स्त्रियों के हाथ में बन्दूक पकड़वाने का अद्भुत साहस दिखलाया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अगली विशेष वक्ता के रूप में प्रो.(डॉ.) विनय कपूर मेहरा, माननीय कुलपति डी.बी.आर.ऐन.एल.यू, सोनीपत उपस्थित रहीं जिन्होनें छात्रों को नेताजी के जीवन से जुड़े संग्राहलयों में जाने के लिए और उनके जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया I
कार्यक्रम के दूसरे सत्र का आरम्भ डॉ. सीमा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, सी. एल. सी, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विशेष वक्ता के रूप में प्रो.(डॉ.) एस.सी रैना, माननीय निदेशक, केआईआईटी स्कूल ऑफ़ लॉ; प्रो.(डॉ.) रमन मित्तल, प्रभारी प्रोफेसर, सी.एल.सी, दिल्ली विश्वविद्यालय; विभव मिश्रा एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट उपस्थित रहे I कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ परस्पर संवादत्मक सत्र को भी रखा गया। अंत में कार्यक्रम की कनवीनर तथा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रमा शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया।
इस कार्यक्रम के चीफ पैट्रन, कुलपति, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा एवं पैट्रन,डीन, स्कूल ऑफ़ लॉ, जस्टिस एण्ड गवर्नेंस, प्रो. (डॉ.) एस. के. सिंह हैं। इस कार्यक्रम के कन्वीनर डॉ.सीमा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, सी.एल. सी, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ लॉ जस्टिस एंड गवर्नेंस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अक्षय सिंह, डॉ. ममता शर्मा तथा डॉ. रमा शर्मा हैं। इस अवसर पर विभिन्न स्कूल के संकाय सदस्यों द्वारा भी भाग लिया गया।

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