आस्था के पर्व छठ पर दिखा कोरोना का कहर, डूबते सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्ध्य

आस्था के पर्व पर कोरोना के कहर के बीच डूबते सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्ध्य


-छठ का पर्व इस वर्ष लोगों ने घर की छत व ग्राउंड में परिवार के साथ मनाया

ग्रेटर नोएडा,20 नवम्बर। दिल्ली एसीआर सहित पूरे देश में कोरोना का कहर लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए शासन प्रशासन से लगातार दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। आस्था का पर्व पूर्वांचल का छठ पर्व वैश्विक रुप ले चुका है, वैश्विक महामारी में छठ पर्व पर कोरोना का कहर देखने को इस बार मिला, लोग अपने घरों के छत पर छठ का पर्व मनाने के लिए मजबूर हो गए हैं। डूबते हुए सूर्य को इस बार लोग अपने घरों में परिवार के साथ दिया। ग्रीन आर्च सोसायटी में लोगों ने छठ पूजा किया, सबसे बड़ी बात की लोग सोशल डिस्टेंस का पालन भी कर रहे। गौतम बुद्ध विवि में रहने वाले शिक्षक स्टाप अपने परिवार के साथ छठ पर्व का आयोजन किया। डॉ. अरविन्द सिंह ने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ है कि घर में सिर्फ परिवार के साथ छठ पर्व का मनाया, यह पर्व नदी के किनारे व घाट पर मनाने की परम्परा रही है।
आस्था के पर्व पर कोरोना के कहर के बीच डूबते सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्ध्यआस्था के पर्व पर कोरोना के कहर के बीच डूबते सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्ध्य
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छठ पूजा करने की क्या है मान्यता
छठ पर्व को लेकर कई पौराणिक और लोक मान्यताएं प्रचलित हैं। पंडित रामदेव ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि लंका पर विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन भगवान राम और सीता ने उपवास कर सूर्यदेव की आराधना की थी। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुन: अनुष्ठान कर सूर्यदेव का आशीर्वाद लिया था। दूसरी कथा के अनुसार, सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की थी। वह रोजाना घंटों पानी में खड़े होकर उदय और अस्त होते सूर्य भगवान को अर्घ्य देते थे। इसलिए छठ में अर्घ्य दिया जाता है। व्रतियों और उनके परिवार के सदस्यों ने इस बार घर की छत व ग्राउंड में घाट बनाकर वेदी पर उपासना की। जिसके बाद अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठी मैया की पूजा-अर्चना की गर्इ। परंपरानुसार व्रतियों ने उपवास रख मुख्य पकवान ठेकुआ बनाया और मौसमी फल, मूली, सिंगाड़ा, गन्ना, नारियल, दूध आदि पूजन सामग्री के साथ पूजा किया। जहां ढलते हुए सूर्य की उपासना कर व्रती महिलाओं ने संतान की रक्षा और परिवार की सुख- शांति के लिए भगवान सूर्यदेव और छठी मैया से प्रार्थना की।

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