ग्रेटर नोएडा। हमारे संविधान द्वारा महिलाओं को पुरूषों के समानांतर अधिकार प्रदान किये है। कानूनन महिलाओं को वह सभी अधिकार प्राप्त है जो पुरूषों के लिए है मगर यदि आम जीवन मे देखा जाये तो ये अधिकार सिर्फ किताबों तक सीमित होकर रह गए है। शालिनी सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता, महिला उन्नति संस्था ने बताया कि चाहे सामाजिक स्तर की बात हो या फिर राजनीतिक, शैक्षिक हो या आर्थिक, घरेलु हो या फिर कामकाजी स्तर की बात हो, हर स्तर पर महिलाओं के साथ भेदभाव साफतौर पर देखा जा सकता है। हम महिलाओं को अपने बराबर अधिकार देना ही नहीं चाहते, कहीं ना कहीं इसके पीछे पुरूषों का अभिमान-अहंकार- असुरक्षा का भाव और महिलाओं को अक्षम- अबला समझना जान पड़ता है, जबकि जब जब भी महिलाओं को अवसर मिला है। उन्होंने अपनी क्षमता को साबित करते हुए हर क्षेत्र में सफलता का परचम लहराया है।
शालिनी सिंह ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब हमें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा और महिलाओं को अवसर प्रदान करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा और इसकी शुरूआत सबसे पहले घरेलू स्तर पर करनी होगी। अपने घर की महिलाओं बेटियों को समान भाव से देखना होगा, उनका सम्मान करना होगा, तभी हम अपने घर-परिवार-गांव-समाज-प्रदेश और राष्ट्र को उन्नत बना सकते हैं।






