उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत बेवीनार में विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत बेवीनार में विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार

ग्रेटर नोएडा,21 अक्टूर। उपभोक्ता अध्ययन केन्द्र, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली एवं सेंट विलफ्रेड्स लॉ कॉलेज, पनवेल, मुबंई के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को एक वेबिनार का आयोजन हुआ। उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार के प्रायोजकत्व में आयोजित कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-2019-ए गेम चेंजर‘ विषयक वेबिनार के उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए। मुख्य अतिथि सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, आईएएस,निदेशक, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली ने कहा कि कोविड-19 की विकट परिस्थिति में उपभोक्ता संरक्षण को लेकर चर्चा-परिचर्चा करना न सिर्फ महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रासंगिक भी है। वर्तमान में बाजारों का स्वरूप काफी तेजी से बदलता जा रहा है, विक्रेता और खरीददार का संबंध अब पारंपरिक स्वरूप वाला नहीं रहा। ऑनलाइन लेनदेन की व्यवस्था से उपभोक्ताओं और विक्रेताओं दोनों को लाभ तो हो रहा है, लेकिन जागरूकता की कमी या लापरवाही के कारण धोखाधड़ी से जुड़ी कई तरह की नई चुनौतियां भी उभर रही हैं। प्रो. सुरेश मिश्रा, चेयर प्रोफेसर एवं समन्वयक, उपभोक्ता अध्ययन केन्द्र, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली ने कहा कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में उपभोक्ता संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता का प्रचार-प्रसार बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार के सहयोग से उपभोक्ता अध्ययन केन्द्र, भारतीय लोक प्रशासन की ओर से उपभोक्ता जागरूकता को लेकर, संगोष्ठियां, प्रशिक्षण कार्यक्रम, चित्रकला प्रतियोगिता, जागरूकता मेला, आदि अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार की परियोजना राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन जिसे उपभोक्ता अध्ययन केन्द्र, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान संचालित करता है, इसके माध्यम से देश भर के उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करने का बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। कोई भी उपभोक्ता टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800114000 या 14404 पर फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। ‘कनर्वजन कार्यक्रम’ के तहत लगभग छह सौ पचास से अधिक कंपनियों के साथ हेल्पलाइन की भागीदारी है। ऐसे में उपभोक्ताओं की समस्याओं का पारदर्शी तरीके से तकनीकी का उपयोग करते हुए समाधान किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देने तथा उनके हितों की सुरक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 को जुलाई 2020 से पूरे देश में लागू किया जा चुका है। इस कानून के विभिन्न प्रावधानों एवं नियमों के माध्यम से उपभोक्ताओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा प्रदान करने की कोशिश जारी है। नई व्यवस्था के अनुसार अब ई-कामर्स कंपनियों को भी उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे लाया गया है। इनके लिए नियम एवं दिशानिर्देश बनाए गए हैं तथा इन्हें लागू भी किया जा चुका है। ऐसा होने से निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
डॉ. मृत्युंजय पाण्डेय (प्रिंसिपल, सेंट विलफ्रेड्स लॉ कॉलेज, पनवेल ) ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि उपभोक्ता संरक्षण के लिए बनाया गया नया कानून बेहतरीन है, लेकिन इस फायदा उपभोक्तओं को दिलाना है तो इसे प्रभावी तरीके से लागू करने की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि जिले स्तर पर कार्यरत उपभोक्ता आयोगों की कार्यप्रणाली में बदलाव करने की जरूरत है, ताकि कम समय तथा कम खर्च में उपभोक्ता की समस्या को दूर किया जा सके। यद्यपि, नए उपभोक्ता कानून में इस सभी बातों का ध्यान रखा गया है और सरकार के स्तर पर इसे लागू करने की पहल भी हो रही है। अब उपभोक्ता देश के किसी भी जिला उपभोक्ता आयोग जिसे पहले जिला फोरम के नाम से जाना जाता था, उसमें ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है। इसी तरह के कई अन्य प्रावधान इस नए अधिनियम में दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस सभी के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए इस तरह के और अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता है।
इस दौरान डॉ. सपना चड्ढा (सहायक प्रोफेसर, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली) ने ई-कामर्स एवं उपभोक्ता संरक्षण विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऑनलाइन शॉपिंग का तेजी से चलन बढ़ा है। डिजिटल माध्यमों से लेनदेन में भी बढ़ोत्तरी हो रही है, लेकिन जागरूकता की कमी के चलते धोखाधड़ी के शिकार भी लोग बन रहे हैं।

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