महर्षि पाणिनि वेद वेदांग विद्यापीठ गुरुकुल में वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुआ ‘श्रावणी उपाकर्म’ एवं ‘ऋषि पूजन’ महापर्व

In Maharishi Panini Veda Vedangpeeth Vidya Gurukul, the great festival of 'Shravani Upakarma' and 'Rishi Pujan' was celebrated with Vedic rituals.

-वेदमंत्रों के पवित्र उद्घोष से गुंजायमान हुआ गुरुकुल परिसर, ब्रह्मचारियों ने धारण किया नूतन यज्ञोपवीत

ग्रेटर नोएडा, 28 अगस्त। वैदिक ज्ञान-विज्ञान, संस्कृत एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित महर्षि पाणिनि वेद वेदांग विद्यापीठ गुरुकुल, सेक्टर-36, ग्रेटर नोएडा में ‘श्रावणी उपाकर्म’ एवं ‘ऋषि पूजन’ महापर्व श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप विधि-विधान से संपन्न हुआ। इस अवसर पर गुरुकुल परिसर वेदमंत्रों के पवित्र उच्चारण से गुंजायमान रहा। कार्यक्रम में गुरुकुल के ब्रह्मचारियों, आचार्यों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने वैदिक परंपरा के अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। प्रातःकाल निर्धारित विधि के अनुसार हेमाद्रि संकल्प एवं दशविधि स्नान का आयोजन किया गया। इसके पश्चात आत्मशुद्धि एवं प्रायश्चित की भावना से पंचगव्य प्राशन का अनुष्ठान संपन्न हुआ। वैदिक परंपरा के अनुरूप देव, ऋषि एवं पितृ तर्पण किया गया। इस दौरान ऋषियों, आचार्यों एवं पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनकी ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया गया। इसके बाद ब्रह्मचारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य नूतन यज्ञोपवीत धारण किया।

समारोह को संबोधित करते हुए गुरुकुल के संस्थापक आचार्य रविकांत दीक्षित ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, प्रायश्चित, स्वाध्याय और कर्तव्यबोध का पर्व है। उन्होंने कहा कि श्रावणी उपाकर्म हमें वर्षभर में मन, वचन और कर्म से जाने-अनजाने हुए दोषों के परिमार्जन तथा आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व संध्या-उपासना, गायत्री जप, स्वाध्याय और अपने कर्तव्यों के प्रति पुनः संकल्पित होने की प्रेरणा देता है। नूतन यज्ञोपवीत धारण करना केवल बाहरी परिवर्तन नहीं, बल्कि अपने दायित्वों और संस्कारों के प्रति नई चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि वेद, संस्कृत, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से युक्त ऐसे संस्कारित एवं राष्ट्रनिष्ठ विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। इस अवसर पर  वेदों के स्वाध्याय एवं वेदमंत्रों के सामूहिक उच्चारण के साथ विशेष पूर्णाहुति यज्ञ संपन्न हुआ। यज्ञ के दौरान विश्वकल्याण, राष्ट्र की उन्नति, समाज में सुख-शांति एवं सभी के मंगल की कामना की गई। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित ब्रह्मचारियों, आचार्यों, अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के लिए गुरुकुल की ओर से महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। पूरे आयोजन में वैदिक संस्कृति, ऋषि परंपरा और गुरुकुलीय जीवन-पद्धति की गरिमामय झलक देखने को मिली।

 

 

 

Spread the love
RELATED ARTICLES
Most Viewed