शारदाकेयर हेल्थसिटी और शारदा हॉस्पिटल में किडनी देखभाल  के लिए डायलिसिस टेक्नीशियन मीट 2026 का हुआ आयोजन

Dialysis Technician Meet 2026 for Kidney Care organised at Shardacare Healthcity and Sharda Hospital

-इस मीटअप में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और गाजियाबाद के 100 से अधिक डायलिसिस टेक्नीशियन शामिल हुए। इस दौरान ट्रांसप्लांट की तैयारी, मरीजों की काउंसलिंग और किडनी की देखभाल के क्षेत्र में हुई नई प्रगति पर चर्चा की गई।

ग्रेटर नोएडा,02 नवम्बर। शारदाकेयर हेल्थसिटी और शारदा हॉस्पिटल ने ग्रेटर नोएडा में ‘डायलिसिस टेक्नीशियन मीट 2026’ का आयोजन किया। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश और गाजियाबाद के 100 से ज़्यादा डायलिसिस टेक्नीशियन किडनी देखभाल में डायलिसिस प्रोफेशनल्स की बदलती भूमिका पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा हुए। ‘बियॉन्ड द मशीन: ‘द डायलिसिस टेक्नीशियन’स रोल इन ट्रांसप्लांट रेडीनेस’’ थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में मरीज़ों की जागरूकता, ट्रांसप्लांट की तैयारी और डायलिसिस टीमों और स्पेशलिस्ट के बीच बेहतर तालमेल पर फोकस किया गया। चर्चा में भारत में सम्पूर्ण किडनी देखभाल की बढ़ती ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया। सरकारी डेटा के मुताबिक, प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम के तहत 4.33 लाख मरीज़ों ने डायलिसिस सेवाओं का लाभ उठाया है, जबकि नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन ने देश भर में 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट रिकॉर्ड किए। इस मीटिंग में मरीज़ों को किडनी ट्रांसप्लांटेशन समेत इलाज के सभी विकल्पों समझने में मदद करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।

सेशन में किडनी ट्रांसप्लांटेशन के मुख्य पहलुओं पर चर्चा हुई, जैसे कि रिसीवर की फिटनेस, डोनर चुनना, क्लीनिकल और सर्जिकल जांच, ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल और मरीज़ की काउंसलिंग आदि। डॉक्टरों ने इस पर बात की कि डायलिसिस टेक्नीशियन, मरीज़ों के साथ नियमित बातचीत करके, उनकी सेहत में होने वाले बदलावों पर नज़र रखने, चिंताओं को दूर करने और लंबे समय तक चलने वाले इलाज के तरीकों पर मेडिकल सलाह देने में कैसे मदद कर सकते हैं।

कार्यक्रम में दिल्ली एसोसिएशन ऑफ़ डायलिसिस टेक्नोलॉजी की बातचीत, एक इंटरैक्टिव सवाल-जवाब सेशन और डायलिसिस और ट्रांसप्लांट केयर में हो रहे अविष्कारों पर चर्चा भी हुई। भागीदारों ने किडनी ट्रांसप्लांटेशन में शामिल चिकित्सीय प्रक्रिया और समन्वित मरीज देखभाल (कोऑर्डिनेटेड पेशेंट केयर) के महत्व को बेहतर ढंग से समझने के लिए हॉस्पिटल के स्पेशलिस्ट से बातचीत की। शारदाकेयर हेल्थसिटी के किडनी ट्रांसप्लांट &यूरोलॉजी विभाग के डॉयरेक्टर डॉ अनिल शर्मा ने कहा, “डायलिसिस कराने वाला हर मरीज किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तुरंत उपयुक्त नहीं होता। इसके लिए मरीज की संपूर्ण सेहत, अन्य बीमारियों और सर्जरी के लिए उसकी शारीरिक फिटनेस का सावधानीपूर्वक जांच करना जरूरी होता है। इन सभी बातों की जानकारी होने से डायलिसिस से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को उनके इलाज के अगले सही कदम के बारे में बेहतर तरीके से मार्गदर्शन दे सकते हैं।”

 

शारदाकेयर हेल्थसिटी के किडनी ट्रांसप्लांट &यूरोलॉजी विभाग के डॉयरेक्टर डॉ  अहमद कमाल ने कहा, “किडनी ट्रांसप्लांटेशन में सबसे ज़रूरी बातों में से एक डोनर की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। डोनर सही है या नहीं, यह देखने और खतरे को कम करने के लिए विधिवत मेडिकल जांच की जाती है। मरीज़ों और उनके परिवारों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि ट्रांसप्लांटेशन एक सावधानीपूर्वक की जाने वाली प्रक्रिया है। इसमें डोनर और रिसीवर दोनों की सेहत मायने रखती है।”

शारदाकेयर हेल्थसिटी के नेफ्रोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ कुनाल राज गांधी ने कहा, “किडनी की बीमारी के आखिरी स्टेज से ग्रसित मरीजों के लिए मेडिकल रूप से उपयुक्त होने पर ट्रांसप्लांट लंबे समय तक डायलिसिस कराने का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इसलिए इस विकल्प पर मरीज और उनके परिवार के साथ समय रहते चर्चा शुरू करना जरूरी है, ताकि उन्हें ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया, पात्रता से जुड़ी शर्तों और उपलब्ध विकल्पों को समझने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।” शारदाकेयर हेल्थसिटी के नेफ्रोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ भीम राज गुप्ता ने कहा, “डायलिसिस केयर में ब्लड प्रेशर, फ्लूइड संतुलन, वज़न में बदलाव और इलेक्ट्रोलाइट लेवल जैसे पैरामीटर पर पूरा ध्यान देने की ज़रूरत होती है। इन नतीजों से डॉक्टरों को मरीज़ के सेहत के बारे में ज़रूरी जानकारी मिलती है और इलाज में ज़रूरी बदलाव करने में मदद मिलती है।”

शारदाकेयर हेल्थसिटी के युरोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ शिल्पी तिवारी ने कहा, “किडनी ट्रांसप्लांट के साथ इलाज खत्म नहीं होता, बल्कि देखभाल और नियमित निगरानी का एक नया दौर शुरू होता है। मरीज़ों को अपनी दवा का शेड्यूल फॉलो करना चाहिए, नियमित चेक-अप करवाना चाहिए और उन लक्षणों के प्रति सावधान रहना चाहिए जिनके लिए मेडिकल मदद की ज़रूरत हो सकती है। ट्रांसप्लांट की गई किडनी की सेहत अच्छी बनाए रखने के लिए इन ज़रूरतों के बारे में जानकारी होना ज़रूरी है।” मीट का समापन डायलिसिस प्रोफेशनल्स और विशेषज्ञों के बीच जानकारी और अनुभव साझा करने को बढ़ावा देने के संदेश के साथ हुआ। इस दौरान मरीजों को जागरूक करने, उनकी सेहत पर लगातार नजर रखने और किडनी के इलाज को बेहतर बनाए रखने में डायलिसिस टेक्नीशियनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। इस अवसर पर शारदा हास्पिटल के गौरव पाण्डेय सहित कई लोग मौजूद रहे।

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