चिरंजीवी ने योगदा सत्संग सोसाइटी को एक शताब्दी से भी अधिक समय तक निरंतर उत्कृष्टता के लिए किया सम्मानित

Chiranjeevi felicitates Yogoda Satsanga Society for its sustained excellence for over a century

हैदराबाद।  पद्म विभूषण पुरस्कार प्राप्त श्री चिरंजीवी ने 99TV के 2026 उगादि पुरस्कारालु पुरस्कार समारोह में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) को उत्कृष्ट आध्यात्मिक सेवा पुरस्कार प्रदान किया। इस प्रकार, तेलुगु भाषी समुदाय और विश्व में क्रियायोग ध्यान के प्रसार में एक शताब्दी से भी अधिक समय तक निरंतर उत्कृष्टता के लिए इसे सम्मान प्राप्त हुआ। सन् 1917 में स्थापित और विश्व स्तर पर निरंतर फलती-फूलती और विस्तृत होती रहने वाली, वाईएसएस क्रियायोग की व्यावहारिक पद्धतियां प्रदान करने वाली आध्यात्मिक ज्ञान की एक प्रकाशस्तंभ बनी हुई है।

एक व्यक्तिगत विरासत
चिरंजीवी के लिए, यह सम्मान एक गहन व्यक्तिगत महत्व रखता है। उनके पिता, स्वर्गीय श्री कोनिडेला वेंकट राव, 1980 के दशक में योगदा सत्संग पाठमाला के एक समर्पित सदस्य थे। उनका नेल्लोर निवास सामूहिक ध्यान का अभ्यास करने वाले वाईएसएस भक्तों के लिए एक मिलन स्थल बन गया था। आज का यह पुरस्कार उस संगठन का सम्मान करता है जिसने उनके परिवार के आध्यात्मिक मूल्यों को आकार दिया।

ध्यान का विज्ञान
वाईएसएस के उपाध्यक्ष स्वामी स्मरणानन्द गिरि ने संस्था के ईश्वर-प्राप्ति के लिए वैज्ञानिक प्रविधियों के प्रसार के कार्य के बारे में अत्यंत प्रभावशाली ढंग स्वीकृति व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा, “हमारे प्राचीन ऋषियों ने मन और श्वास के बीच संबंध की खोज की, और हमें मन को नियंत्रित और स्थिर करने की पद्धतियां भेंट दीं। जब कोई भी व्यक्ति समझ जाता है कि ध्यान कैसे करना है, तो वे इसका अभ्यास करेंगे। योगदा सत्संग पाठमाला इन पद्धतियों को वैज्ञानिक ढंग से समझाती है और उसके विशिष्ट एवं स्पष्ट परिणाम प्राप्त होते हैं। क्रियायोग शारीरिक रोगों, मानसिक असंतुलन और आध्यात्मिक अज्ञानता को दूर करने में सहायता करता है, शरीर, मन और आत्मा के संपूर्ण विकास को सक्षम बनाता है।”

तेलुगु भाषा : ईश्वर तक पहुँचने का सेतु
तेलुगु में चरणबद्ध, गृह-अध्ययन पाठमाला प्रदान करने की वाईएसएस की प्रतिबद्धता ने लाखों भक्तों को अपने दैनिक उत्तरदायित्वों का ध्यान रखते हुए क्रियायोग का अभ्यास करने में सक्षम बनाया है। यह पहुंच अपनी ही बृहद् आत्मा (परमात्मा) के रूप में मानव जाति की सेवा करने के वाईएसएस के मूल सिद्धांत को मूर्त रूप देती है।

स्वामी स्मरणानन्द गिरि का सम्मान
यह पुरस्कार वाईएसएस के उपाध्यक्ष स्वामी स्मरणानन्द गिरि को प्रदान किया गया। आंध्र प्रदेश के मूल निवासी और आई.आई.टी खड़गपुर से पीएचडी प्राप्त स्वामी स्मरणानंद ने सन् 1985 में प्रतिष्ठित शैक्षणिक और वैज्ञानिक पदों के स्थान पर आध्यात्मिक सेवा को चुना। आई.आई.टी खड़गपुर ने सन् 2018 में उन्हें प्रतिष्ठित पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया।

वाईएसएस का पवित्र मिशन
यह पुरस्कार वाईएसएस के मूल उद्देश्यों और आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को मान्यता प्रदान करता है :
⁠ ⁠ईश्वर-प्राप्ति के लिए वैज्ञानिक प्रविधियाँ : सुव्यवस्थित गृह-अध्ययन पाठमाला के माध्यम से मानवीय चेतना को ईश्वर-चेतना में विकसित करने में साधकों को सक्षम बनाना
•⁠ ⁠दुख से मुक्ति : मानव जाति को शारीरिक रोग, मानसिक असामंजस्य और आध्यात्मिक अज्ञानता से मुक्त करना
•⁠ ⁠ईश्वर के मंदिर : लोगों के घरों और हृदयों में आध्यात्मिक अभ्यास को प्रोत्साहित करना
•⁠ ⁠मानवता की सेवा : अपनी ही बृहद् आत्मा (परमात्मा) के रूप में मानव जाति की सेवा करना

 

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