बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के तहत गौड़ इंटरनेशनल स्कूल के प्रयासों की डॉ. महेश शर्मा ने प्रशंसा की

Dr. Mahesh Sharma praised the efforts of Gaur International School under Beti Bachao, Beti Padhao

ग्रेटर नोएडा। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर सांसद डॉ. महेश शर्मा ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में गौड़ इंटरनेशनल स्कूल का दौरा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल “बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओ” (बीबीबीपी) के अंतर्गत स्कूल के प्रयासों की प्रशंसा लाभार्थियों के बीच की। उनके साथ उत्तर प्रदेश विधान सभा के विधायक तेजपाल नागर भी उपस्थित थे। इस अवसर पर गौड़ बीबीबीपी स्कूल के छात्रों ने स्कूल में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम किया। इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्ति धर्मवीर सिंह, डीआईओएस, ऐश्वर्या लक्ष्मी, बीएसए और अरविंद मिश्रा, क्षेत्रीय निदेशक (आरओ, सीबीएसई) और सहायक सचिव भी शामिल हुए।

गौड़ ग्रुप ऑफ स्कूल की निदेशक मंजू गौड़ कहती हैं, “गौड़ इंटरनेशनल स्कूल मेरे द्वारा 2015 में देखा गया एक सपना था। यह हमारे नीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के आह्वान को प्रतिध्वनित करता है। हम लड़कियों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने में सबसे आगे हैं और अपने विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का उपयोग करके उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।”

विधायक तेजपाल नागर ने यहाँ छात्राओं के शैक्षणिक गतिविधयों से प्रभावित होकर कहा, “प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” पहल की शुरुआत देश में बालिकाओं को सशक्त करने के लिए की थी। आज यहाँ जिस तरह से बालिकाओं ने अपने ज्ञान का प्रदर्शन किया वो उत्साहित कर रहा है। मैं स्कूल के प्रयासों की प्रशंसा करता हूँ।

गौड़ इंटरनेशनल स्कूल समाज सेवा की अपनी पहल के हिस्से के रूप में भारत सरकार की “बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” योजना के तहत मुफ्त शिक्षा प्रदान कर रहा है। इस पहल के तहत समाज के कमजोर वर्ग की कुल 440 लड़कियों को स्कूल में नामांकित किया गया है। छात्रों के साथ बातचीत करते हुए अतिथि विशेष रूप से भारत की सांस्कृतिक विरासत और इसके गौड़वशाली अतीत के बारे में छात्रों के ज्ञान से प्रभावित हुए। गौड़ सिटी, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में गौड़ इंटरनेशनल स्कूल एक प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान है और इसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया गया है जिसमें कम छात्र-शिक्षक अनुपात, अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक सहायता, अच्छी तरह से प्रशिक्षित शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी शामिल हैं। इसके साथ ही व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देने के लिए पाठ्येतर और सह-पाठयक्रम गतिविधियों पर जोर दिया जाता है।

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