श्रीमद् भागवत गीता ज्ञान कथा में सुनाया सती चरित्र प्रसंग

श्रीमद् भागवत गीता ज्ञान कथा में सुनाया सती चरित्र प्रसंग

रबूपुरा। गांव मिर्जापुर में आयोजित श्रीमद् भागवद् गीता ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन सती चरित्र प्रसंग सुनाया गया। इस दौरान बृंदावन धाम से पधारे प्रेम कृष्ण शास्त्री ने बताया कि किसी भी आयोजन में बिना निमंत्रण जाने से पूर्व एक बात का अवश्य ध्यान रखें की वहां आपका, आपके ईष्ट या अपने गुरू का अपमान तो नहीं होगा और यदि ऐसी आशंका है तो ऐसे स्थान पर नहीं जाना चाहिए। शिव की बात नहीं मानकर अपने पिता के घर जाने के कारण अपमानित होकर सती को स्वयं अग्नि में स्वाहा होना पड़ा था। इसके साथ ही उन्होंने ध्रुव भक्त के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि परमात्मा को पाने के लिए कोई निश्चित उम्र, जाति विशेष व बिरादरी को होना जरूरी नहीं होता। अपितु जो परमात्मा को अपने आप को सर्मपण कर दे वही उसका होता है। बेहद सुंदर श्लोकों व संगीतमय कथा सुन श्रोतागण मन-मुग्ध हो गये। इस दौरान आयोजक सुरेश सिंह, ललित भाटी, श्रीपाल मास्टर, प्रेमा देवी, दुलीचंद भाटी, सुखपाल सिंह, नारायण सिंह, मुकेश भाटी, देशराज सिंह, ललित, सुरजन, लोकेश, बबीता, श्यामवती, गुड़िया आदि सैकड़ों पुरूष व महिलाएं उपस्थित रहे।

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