ईशान एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में मेडिकल के छात्रों ने पर्यावरण रक्षा के लिए सामवेद परायण महायज्ञ में किया हवन

Medical students at Ishan Educational Institute performed havan in the Samveda Parayan Mahayagna to protect the environment.

ग्रेटर नोएडा। ईशान एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, ग्रेटर नोएडा  में विश्वव्यापी पर्यावरण की समस्या को यज्ञ द्वारा शुद्धिकरण हेतु मेडिकल एवम कानून की पढ़ाई कर रहे लगभग आठ सौ छात्रो द्वारा विगत दो दिन से सामवेद परायण महायज्ञ किया जा रहा है। जिसमे दुर्लभ जड़ी बूटियो मेवाओ के संयोजन से तैयार की गई है, वैदिक रीति से शुद्ध सामग्री एवं गौग्रन्थ का प्रयोग किया जा रहा है। यज्ञ का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं सुप्रसिद्ध विद्वान डॉ जयेन्द्र आचार्य नोएडा के मार्गदर्शन में हो रहा है l इन्होंने बताया की हवन सामग्री ऋतु एवं काल के अनुसार ही होनी चाहिए जिसमे सूक्ष्म जीवाणु समाप्त होते है तथा फसल अच्छी होती है। यज्ञ में वेद पाठ करने के लिए जयपुर दिल्ली नजीबाबाद आदि से गुरुकुल की कन्याएं आई हुई है और बीच बीच में शंका समाधान की भी व्यवस्था है। यज्ञ जीवन का सर्वश्रेष्ठ कर्म है, ऐसा ऋग्वेद में लिखा है। चारों दिनों तक वेद मंत्रों की गूंज से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर रहेगा l इस यज्ञ का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास करना है।

संस्थान के चेयरमैन डॉ डी के गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि सामवेद परायण महायज्ञ जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का माध्यम हैं। इससे विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों का संचार होता है।” उन्होंने आगे कहा कि ईशान एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन सदैव शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास को भी समान महत्व देता है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिदिन हवन, प्रवचन एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। अंतिम दिवस पर पूर्णाहुति के साथ सभी के सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाएगी। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन वैदिक आचार्यों के निर्देशन में अत्यंत श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ किया गया। ईशान एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन भविष्य में भी इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

 

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