ग्रेटर नोएडा,3 मई। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने कोविड-19 का मुकाबला करने में भावनात्मक बुद्धिमत्ता की भूमिका पर वेबिनार आयोजित की। इस वेबिनार के लिए मांग इतनी अधिक थी कि आयोजकों को इसकी सीमा दो बार बढ़ानी पड़ी। प्रतिनिधि न केवल सम्पूर्ण भारतवर्ष से थे बल्कि विदेशों से भी थी जिसमें ऑस्ट्रेलिया एवं वियतनाम प्रमुख थे। प्रतिनिधि शिक्षा, मनोविज्ञान, अन्य सामाजिक विज्ञान और मीडिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों से थे। वेबिनार का आयोजन गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के शिक्षा और प्रशिक्षण विभाग के प्रमुख डॉ. विनोद शनवाल द्वारा किया गया था। डॉ. शनवाल भावनात्मक बुद्धिमत्ता के विशेषज्ञ हैं और दो दशकों से अधिक समय से इस विषय पर काम कर रहे हैं। अपने भाषण में डॉ. विनोद शनवाल ने भावनात्मक बुद्धि के प्रमुख घटकों पर प्रकाश डाला, जैसे कि भावनाओं को पहचान, भावनाओं की अभिव्यक्ति, भावनात्मक समझ, भावनाओं को समझना, सामाजिक जागरूकता, आत्म प्रेरणा और सहानुभूति, इत्यादि की सहायता से भावनाओं पर नियंत्रण किया जा सकता तथा अपने आपको ठीक रखने मे मददगार हो सकती है। ये कोविड- 19 महामारी द्वारा उत्पन्न संकट के साथ प्रभावी ढंग से काम करने में एक लंबा रास्ता तय कर सकते हैं। छात्र समुदायों को अपने शिक्षकों से जोड़े रखने के लिए मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग करने के फायदों पर भी प्रकाश डाला गया। जैसा कि डॉ. शनवाल ने टिप्पणी की ” सामाजिक दूरी कोई भावनात्मक दुरी नहीं है “। साथ ही महामारी के संबंध में किसी भी जानकारी को प्रसारित करने के दौरान संयम बरतने की कवायद पर भी जोर दिया गया। यह एक अत्यधिक संवादात्मक और आकर्षक सत्र था। यह भी चर्चा की गई थी कि छात्र अपने तनाव को तनाव को कैसे काम कर सकते है एवं भावनात्मक बुद्धिमता किस प्रकार से तनाव दूर करने मे सहयक हो सकती है. साथ ही साथ यह भी चर्चा हुई कि तनाव को कम करने मे कौन कौन से विधि का प्रयोग कर सकता है जैसे योग, मैडिटेशन, लंबा सांस लेना, अपनी भावनाओ को लिखकर प्रकट करना आदि विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। एक पैनल एक पैनल डिस्कशन भी किया गया जिसमे जिसमें सुश्री नीलू व्यास, सीनियर जर्नलिस्ट ने कोविड-19 के संबंध में कोई भी जानकारी साझा करते समय संयम बरतने के बारे में उल्लेख किया। उन्होंने किसी भी न्यूज़ को फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सत्यता का पता करने के लिया भी कहा। अन्य पैनलिस्ट डॉ. रविंदर सिंह, आईसीएमआर के सीनियर साइंटिस्ट ने तनाव न लेने और संकट के दौरान खुश और सकारात्मक रूप से प्रेरित रहने की बात कही। अंत में डॉक्टर शैवाल ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर भी दिए। सुश्री त्रिशला भास्कर, ने वेबिनार आयोजन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्होंने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। अंत में डॉ. शनवाल ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। उन्होंने कुलपति प्रो भगवती प्रकाश शर्मा और डॉ. नीती राणा, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एण्ड सोशल साइंसेज के मार्गदर्शन और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने पैनलिस्ट, प्रतिनिधियों और उनकी शोध टीम त्रिशला, मन्नत, आंचल को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने अपनी प्लेटफॉर्म और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए विवेक और अनुराग का उल्लेख किया था।
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