आईएचटी संस्थान में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित

Seminar organized on the birth anniversary of Chhatrapati Shivaji Maharaj at IHT Institute

ग्रेटर नोएडा। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर इंस्टीट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर टेक्नॉलॉजी(आईएचटी) नॉलेज पार्क में परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें छत्रपति शिवाजी के जीवन और वीरता पर चर्चा की गयी। संगोष्ठी में संदीप सूदन को-चेयरमैन, आईएचटी, डॉ. विजयन कौल, डी.सी शर्मा, अनीता, डॉ. वीरेन्द्र पटेल, ललित प्रताप सिंह, यामिनी भदौरिया, राकेश गौस, आशीष रंजन, संजीव कुलश्रेष्ट ने अपनी बात रखी। डॉ. विजयन कौल ने बताया छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को मराठा परिवार में हुआ था। उनके जन्मदिवस के अवसर पर ही हर साल 19 फरवरी को भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती मनाई जाती है। उनकी सेना पहली ऐसी थी जिसमें गुरिल्ला युद्ध का जमकर इस्तेमाल किया गया। ज़मीनी युद्ध में शिवाजी को महारात हासिल थी। वो एक धार्मिक हिंदू के साथ दूसरे धर्मों का भी सम्मान करते थे, वे संस्कृत और हिंदू राजनीतिक परंपराओं का विस्तार चाहते थे। मराठा साम्राज्य की शानदार विजय पताका फहराने वाले महान शूरवीर छत्रपति शिवाजी एक ऐसे ही योद्धा थे। मुगलों को उनकी औकात बताकर उनके सबसे क्रूर शासक औरंगजेब को शिकस्त देने वाले भारत के इस वीर की सच्ची कहानियां ठीक से प्रचारित ही नहीं की गई। छत्रपति शिवाजी को शिवाजी राजे भोसले के नाम से भी जाना जाता है। शिवजी की महानता सिर्फ युद्ध कौशल और बहादुरी में ही नहीं थी, बल्कि एक  योग्य प्रशासक भी थे। धर्म के आधार पर कभी भी उन्होंने पक्षपात नहीं  किया। उन्होंने कभी किसी नारी का निरादर नहीं किया। यहाँ तक की युद्ध में हारे हुए दुश्मनों की स्त्रियों को भी सम्मान किया। गोर्रिल्ला युद्ध, किलो का उपयोग और नव सेना का निर्माण भारत में पहली बार शिवजी ने किया था। शिवाजी  का सन 1674 में राज्य अभिषेक हुआ और वह छत्रपति बने। उन्होंने रायगढ़ को अपनी  राजधानी बनाया।

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