GIMS के बालरोग विभाग में सर्पदंश का हर सम्भव ईलाज उपलब्ध”- डॉ. (बिगे०) राकेश गुप्ता

Treatment of snakebite is always available in Pediatrics Department of GIMS" Dr. (Big 0) Rakesh Gupta

ग्रेटर नोएडा। जहां देश में  विश्व में सर्वाधिक मृत्युदर सर्पदश के बच्चों में उत्तर प्रदेश में है, वही जनपद गौतम बुद्धनगर के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( GIMS) ग्रेटर नोएडा में सर्पदश का जीवन दायनी ईलाज हो रहा है। “संस्थान में दक्ष बालरोग विभाग की चिकित्सीय टीम आधुनिक चिकित्सीय उपकरण व औषधियों से सपन्न है जो सर्पदश के मरीज के उपचार के हर समय उपलब्ध रहती है। जिसमें पिछले 4 महीने में आये 8 सर्पदश के मरीजो (बच्चे) का ईलाज हर स्तर पर सफल रहा और सकारात्मक परिणाम आये जबकि इन बच्चों के परिवार वालों ने बच्चों के जीवन की आशा ही छोड़ दी थी। लेकिन ये सभी मरीज यहां के दक्ष चिकित्सीयदल द्वारा आधुनिक विधि से उपचारित किये गये। जिससे परिवार के सदस्यों की निराशा खत्म हो गई और मरीज बच्चे आज अपने मा बाप के साथ किलकारियों सहित घर को गए।

GIMSके लिए और प्रदेश सरकार के लिए ये एक चिकित्सा क्षेत्र में बहुत बडी (Achievement) है जिस पर हम सभी को गर्व होना चाहिएक्योंकि GIMSप्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार के माध्यम से जो सुविधायें यहाँ उपलब्ध करायी गयी है उनके माध्यम से इस भयानक बीमारी का लगभग 100 प्रतिशत ईलाज GIMSमें सम्भव है वो भी अधिकांश उन लोगों के लिए है जो मुख्यत प्राइवेट अस्पताल में PIC Uका खर्चा और Anti snake Venamका खर्चा नहीं उठा सकते हैं क्योंकि यहाँ जो में सर्पदंश से ग्रसित बच्चों के इलाज के लिए आये वो बहुत ही गम्भीर स्थिति में लगभग सास तोड़ते हुए स्थिति में भर्ती हुए और उनको पेन्टीलेटर (जीवन रक्षक प्रणाली) पर रखा गया और सरकार द्वारा निशुल्क प्रदान किये गये एण्टी स्नेक वीनम (ASV) को तुरन्त दिया गया। ऐसे मरीजों के लिए GIMSप्रशासन उ0 प्र0 सरकार के सहयोग से अपना अधिकतम प्रयास करके इनके और इनके परिवार के चेहरों पर खुशी लाने और आशावादी रखने के लिए लगातार प्रयासरत है।

इन सर्पदेश के कुछ बच्चों के परिवार ने तो मानसिक रूप से हार मान ली और बच्चों के इलाज को बीच में ही रुकवा कर घर ले जाने की बात कही जिसके •लिए यहाँ की टीम ने लगातार परिवार के मनोबल को बढाया और अन्त में परिणाम जो निकला उससे ईलाज करने वाले सभी सदस्यों के चेहरों पर मुस्कान और सफलता का संतोष था तथा परिवार के सदस्यों के शब्दों में आश्चर्य और GIMS एवं यहाँ की बाल रोग टीम के लिए न रुकने वाला धन्यवाद और दुआयें थी।

कितनी बड़ी समस्या है सर्पद:-

विश्व में सर्वाधिक सर्पदश के मरीज दक्षिण पूर्व एशिया में मिलते हैं और जिसमें भारत में अधिकतम सर्पदश से जुड़ी मौत होती है, जिसमें से एक (25%) 5 से 14 साल की आयु के बच्चों में होती है और ये भी अधिकतम ग्रामीण परिवारों में और मानसून के समय होती है। चौथाई

समस्या क्यों:-

सर्पदंश का बच्चों में ईलाज GIMS जैसे कई संस्थान में सम्भव है भारत में फिर भी सर्वाधिक मृत्युदर है जिसकी वजह निम्नवत है-

  1. सामुदायिक जानकारी (Awarness) का न होना समाज में भातिया अधिक है, जबकि समाज वास्तविक जानकारी से दूर।
  2. साधारण बचाव की प्रक्रिया का पालन न करना।
  3. हानिकार और आन्तियुक्त प्राथमिक उपचार का प्रयोग करना जैसे-पैर को बहुत मजबूती से बाध देता सर्पदेश की जगह काट देना और सर्पदश घाव को मुंह से साफ करना।
  4. देर से सर्पदंश के मरीज का एण्टी स्नेक बीनम (ASV) उपलब्ध अस्पताल में रिफर का होना अगर ASV मिलने में देरी होती है, तो मृत्यु दर बढ़ जाती है।

5.प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पर A.S.V दवा के देने का आत्मविश्वास में कमी होना

सर्पदर्शन के लक्षण-

1-अक्सर सर्पदश खुले में सोये हुए या सर्प के सम्मावित स्थान पर खेलते हुए बच्चे में मिलता है।

  1. सर्पदंश के निशान (फंज मार्क्स) मिलते हैं।
  2. सर्पदश वाली जगह पर दर्द और सूजन का होना।

4-शरीर के विभिन्न अंगों से स्वत खून का बहना (निकलना) |

  1. पलकों का बन्द होना, आँखों में दर्द खाना निगलने और सास लेने में रुकावट।

6- अन्त में मरीज का लॉक्ड इन सिंड्रोम में जाना, जिसमें सर्पदंश का मरीज होश में होता है लेकिन पैरालिसिस की वजह से बात-चीत नहीं कर पाता है और आँख की पुतली भी अपना नार्मल काम करना छोड़ देती है।

पहले तो मरीज अपनी जाति और अज्ञानता यश देर में अस्पताल आता है, जैसे पहले किसी जगह झाड-फूक या अन्य ईलाज करायेंगे, फिर देर होत होते अस्पताल में मरीज को (LOCKED IN SYNDROME) की अवस्था में लेकर आयेंगे जिसमें परिवार के सदस्य तुरन्त ईलाज लाभ न होने पर मरीज को वापस ले जाने की अधिकाश बात करते है. कि अब डॉक्टर साहब मरीज को हमें दे दो हमे पता है कि हमारे बच्चे में अब कुछ जीवन नहीं है।

 सर्पद का उपचार

सर्पदश को उचित और समय से उपचार मिलने पर अधिकतम मृत्युदर कम की जा सकती है-

प्राथमिक उपचार

DO’S (क्या करें?)

Do It RIGHT.

R-Reassure the Patient– हमें मरीज और उसके परिवार के सदस्यों को समझाना हैकी सर्पदश लगभग 70 प्रतिशत विषमुक्त होते हैं, क्योंकि 70 प्रतिशत सर्प में विष पाया नही जाता है और अगर सर्पदश विषयुक्त (poisonous) सर्प से हुआ भी है तो उसमें 50 प्रतिशत सर्प अपना विष मरीज के शरीर में नहीं पाते है जिसका सबसे बड़ा फायदा आइ-फूक करने वाले लोग और यही अज्ञानता जरूरत मन्द लोगों के सही उपचार में बाधक बन जाती जो कि सर्पदंश से मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बनती है।

I- Immobilize The patient: (मरीज को एक दम चलने से मना करना है)

देखा गया है कि हाथ पैर न चलाने से विष का शरीर में फैलना धीमे हो जाता है। अगर कोई किलोमीटर या 10 मिनट से ज्यादा सर्पदेश के बाद चलता है मृत्युदर के बढ़ने की बात पायी गई है। कभी भी हाथ या पैर को बहुत अधिक मजबूत नहीं बचना है, बल्कि प्रेशर बैन्डज (पटटी) की तरह बाधना है, जिसमे धमनी से रक्त आता रहे और शिराओं के संकुचित होने से विष के प्रवहन को रोका जा सके

GH-Get to Hospital Immediately:- अर्थात बिना देर किये हुए जैसे बिना किसी आइ- फुक, और नाति युक्त ईलाज के तुरन्त अस्पताल पहुंचे. क्योंकि ये सिद्ध हो चुका है, कि इस सबका कोई फायदा नहीं है।

T- Treatment-तुरन्त ईलाज करने वाले डॉक्टर को साप की प्रजाति और आये हुए लक्षण के बारे में बतायें, जिससे चिकित्सक उचित इलाज के बारे में तैयारी शुरू कि जाये।

Don’t कुछ चीजें कमी न करें

जैसे-

  1. सर्पदंश की जगह घाव बनाना (Cut करना)

2 सर्पदश घाव को मुह से साफ करना (Suck करना)

3 काले पत्थर का उपयोग करना (Black Stone)

  1. पैर में बहुत तेज रस्सी से बांधना

5- बिजली के झटका या किसी रसायन (Chemicals), घास-फूस या बर्फ का लगाना।

Anti-Snake Venom (एण्टी स्नेक बीनम)

सर्पदंश के इलाज में ASV रामवाण इलाज है। अगर उचित समय पर और उचित मात्रा में सर्पदेश के मरीज को मिल जाये, तो मरीज की जान (Life) बचने की सम्भावना बड़ जाती हैजो कि उ०प्र० सरकार और जी०आई०एम०एस० प्रशासन के बेहतर प्रयासों से जी०आई०एम०एस० में सबके लिए निशुल्क उपलब्ध है। देखा गया है कि अगर मरीज को पहले घण्टे ( 1 hour of snake bite ) में A.S.V मिल जाता है तो जीवन रक्षक प्रणाली की जरूरत और P-ICU में रखने के समय की अवधी को कम किया जा सकता है। जिससे ICU और काम करने वाली टीम को अन्य गम्भीर मरीजों के लिए उपलब्धता बढ़ायी जा सकती है। A.S.V.को तुरन्त देते हुए हमें उसके रेस्पोंस और प्रभाव को देखते रहना होता है और अगर जरूरत पड़ती है तो दुबारा भी देना पड़ सकता है।

सबसे मुख्य बात है, कि छोटे से छोटे बच्चा हो या बड़ा से बड़ा व्यक्ति (Adult) ही क्यों न हो A.SVकी प्राथमिक (पहली) खुराक (Dose) समान होती क्योंकि सर्पदेश से अगर विष शरीर जाता है तो उसकी मात्रा सभी सर्पदश में समान होती है, सर्पदश पर फिर चाहे छोटा सा नवजात हो या 100 किलो ग्राम का वायस्क हो

Editing

सर्पोटिव इलाज-

अगर मरीज हमारे पास देर में आता है और हालत बहुत गम्भीर होती है, जिसमें Supportiveईलाज करना पड़ता है, जैसे-

  1. जीवन रक्षक प्रणाली (Ventilator-वेन्टीलेटर)
  2. रक्तदाब बढ़ाने की दवाई (आयनोट्रॉप्स)
  3. गुर्दे की सफाई (डायलिसिस)
  4. रक्त और रक्त कणिकाओं को शरीर में चढ़ाना (Blood Transfusion)
  5. सर्पदंश घाट की सफाई करना

6 नोजोकोमियल इन्फेक्सन जो कि अस्पताल में हो सकता है, उसे रोकना (Nosocomial Infection)

7 पैरों या हाथों में कम्पार्टमेन्ट ईसन्ड्रोम को बनने से रोकना।

बच्चों में मृत्यु, दर ज्यादा क्यों

जैसा कि हम जानते हैं, कि सर्पदेश की मृत्यु का अधिकतम (25%) 5-14 साल के आयुकाल में पाया गया है, क्योंकि

1-बच्चों का शरीर (Body Surface Area) या वनज (Weight) कम होता जिससे सर्पविष की सादृता (Poison Contrition) बच्चों में अधिक होती है. जिससे तेजी से विष का असर दिमाग और शरीर के अंगों पर पड़ता है।

  1. सर्पदंश पर सर्प के द्वारा शरीर डाली गई विष की मात्रा समान होती है बच्चों और वयस्क दोनों के लिए।

3-बच्चे अधिकतर बता ही नहीं पाते कि है, कि सर्पदश हुआ या कुछ और जिससे सर्पदश पहचानने में देरी होती है।

भावार्थ-

एक तरफ विश्व में भारत में उत्तर प्रदेश में सर्पदश से जुड़ी अधिकतम मृत्युदर है, वहीं उत्तर प्रदेश में ही उत्तर भारत के सबसे तेजी से चिकित्सा के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित करने वाले राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान ग्रेटर नोएडा(Government Institute of Medical Science) के बालरोग विभाग (Dept of Pediatric) ने लगभग 100% मूल्यदर पर रोक लगाया है,

पिछले 4 महीने में 8 सर्पदेश के मरीजों (जिनमें से अधिकाश जीवन रक्षक प्रणाली पर रखने पढ़ें) का ईलाज करके घर भेजा जो कि हम सबके लिएएक गर्व की बात है, और जरूरत है, कि समाज की जागरुकता को बढ़ाया जाये और संस्थाने में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में लोगों को बताया जाये जिससे सर्पदश के मरीज सीधे बिना किसी देरी के अस्पताल में आये और उनको P-ICU (पिडियाट्रिक ICU ) तथा Anti Snake Venom दवा की जरूरत कम से कम पड़े जो कि सरकार द्वारा हमारे यहां निशुल्क सबके लिए उपलब्ध है।

अगर हम समय से अस्पताल (GIMS) आयेगे तो कम समय और कम A S Vमें मरीज का इलाज होगा जिससे ये महंगी दवा किसी और जरूरतमन्द / गरीब मरीज के उपलब्ध रहेगी। अब आगे जरूरत हूँ. कि समाज में स्वास्थ्य शिक्षा के लिए जागरूकता कॅम्प, प्रिन्ट मीडिया में और पत्रिका में अभिलेख देकर हम ये सन्देश पहुचायें कि –

  1. किसी झाड़-फूंक वाले व्यक्ति के पास नहीं जाना है, क्योंकि उनके ईलाज से जो लोग सही होते ते उनके ईलाज से नहीं बल्कि (But) विषमुक्त (non poisonous) सर्पदश की वजह से होते है जिसका वो झूठा फायदा उठाते हैं।

2-लेकिन जब विषयुक्त poisonous) सर्पदश होता है, तोझाड़-फूक की देरी की वजह से मरीज की स्थिति गस्तीर हो जाती है।

  1. बच्चों में सर्पदश बहुत जल्दी और ज्यादा घातक हो जाता है अगर तुरन्त ईलाज न लिया जाये।

इसलिए GIMS बालरोग विभाग का अनुरोध है कि सामाजिक शिक्षा और सहयोगी को बढ़ावा देकर सर्पदा को कम करें और जनमानश संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं के वारे में अपने आस-पास चर्चा करें और सर्पदंश से होने वाली बहुमुल्य जीवन की रक्षा करने में सयोग करें।”

Dr. Ruchika Bhatnagar

Associate Professor and HOD Department of pediatrics

GIMS GREATER NOIDA

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