-लॉक डाउन में ओजोन की स्थिति सकारात्मक,गंगा में डॉल्फिन की उपस्थिति से जल की गुणवत्ता में हुआ सुधार
ग्रेटर नोएडा,25 मई। गलगोटियाज विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर और बेसिक एण्ड एप्लाइड साइंसेज के साथ संयुक्त रूप से कोविड-19 पर एक ऑनलाइन वेबिनार साप्ताहिक व्याख्यान श्रृंखला आयोजित की गई। वेबिनार में प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता पर विशेष रूप से चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य व्याख्यान वक्ता के रूप में वानिकी विभाग, डॉल्फिन (पी.जी.) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एण्ड नेचुरल साइंसेज, देहरादून के प्रमुख और वनस्पति विज्ञान प्रभाग, वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रो. सास विश्वास उपस्थित रहे।
प्रो. विस्वास ने कोविड-19 की उत्पत्ति और मनुष्यों एवम वन्यजीवों पर इसके प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने ईबोला, सारस, मेर्स और ज़ीका जैसे वायरस-आधारित रोगों पर भी चर्चा की। प्रो. बिस्वास ने लॉकडाउन के बाद के ओजोन रिक्तीकरण और सुधार के कुछ मामले अध्ययन प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मेरठ में गंगा डॉल्फिन की उपस्थिति के साथ जल निकाय की गुणवत्ता में सुधार लॉकडाउन के सकारात्मक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। रिमोट सेंसिंग के माध्यम से सैटेलाइट इमेजरी ने गंगा नदी के बेसिन में अशांति की कमी को दर्शाया है। प्रो. विस्वास के व्याख्यान से वेबिनार को एक बड़ी सफलता मिली, जिसमें 100 से अधिक छात्रों, संकाय सदस्यों, वरिष्ठ अध्यापकों और गोलगोटियाज विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों के प्रतिभागियों ने भाग लिया। वेबिनार के दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. प्रिति बजाज, एग्रीकल्चर विभाग अध्यक्ष गणेश भट्ट और बेसिक एण्ड एप्लाइड साइंसेज विभाग के अध्यक्ष ए.के. जैन आदि मौजूद रहे।
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