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जीबीयू में चल रहे पटापेक्ष की आंतरिक समिति ने सौंपी जांच रिपोर्ट

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ग्रेटर नोएडा,29 अगस्त। विगत दिनों विश्वविद्यालय में घटित कुछ अप्रिय घटना कर्मो को लेकर प्रसारित समाचारों से कई प्रकार की भ्रांतियां उत्पन्न हुई है। इन घटनाक्रमों में संबंधित व्यक्तियों के संबंध में विश्वविद्यालय ने अधिकतम संयम रखते हुए विश्वविद्यालय के अधिनियम, परिनियम एवं अध्यादेशाें व अन्य नियमों के अनुपालन के क्रम में न्यूनतम कार्यवाही प्रारंभ की है।

1. कुलपति की स्टाफ ऑफिसर का निलंबन:

इनके द्वारा प्रस्तुत चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की पीएचडी की डिग्री की वैधता संशय पूर्ण होने से विश्वविद्यालय ने इनकी पीएचडी की डिग्री का सत्यापन कराया व उसके संबंध में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ ने अपने लिखित प्रत्युत्तर में बताया कि वह पीएचडी की डिग्री चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ द्वारा निर्गत नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में इस संपूर्ण प्रकरण की जांच कर उस पर उचित कार्यवाही करना विश्वविद्यालय का विधिक कर्तव्य है। जांचकर्ता अधिकारी, आरोपित अधिकारी के किसी संभावित दबाव में ना रहे इसके लिए जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारी का निलंबन एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। निलंबन किसी प्रकार के दंड की श्रेणी में भी नहीं आता है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा इस प्रकरण में तथ्यान्वेषण विगत 2 माह से किया जा रहा था। पर्याप्त साक्ष्य मिल जाने से उपरांत ही स्टाफ ऑफिसर का निलंबन कर जांच समिति गठित की गई थी। ऐसी स्थिति में 2 माह से चल रही जांच एवं 18 अगस्त 2020 को किए गए निलम्बन के उपरांत स्टाफ ऑफिसर द्वारा कार्यवाही कुलसचिव पर पिछली तिथि में यौन शोषण किए जाने का आरोप लगा दिया गया है। उस यौन शोषण के आरोप की जांच भी विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के सुपुर्द की जा चुकी है। ऐसे में जांच पूरी होने तक संचार माध्यमों द्वारा दोनों जांच का परिणाम आने के उपरांत इस विषय का प्रकाशन प्रमाणिक तथ्यों के साथ करेंगे तो लोगों को सही प्रामाणिक समाचार प्राप्त हो सकेंगे।

2. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की प्राध्यापिका द्वारा दो स्थानों पर नौकरी का प्रकरण:

विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने सऊदी अरब में अनुसंधान हेतु 10 माह का अध्ययन अवकाश (Sabbatical Leave) स्वीकृत कराया था। जिसकी प्रथम शर्त थी कि वह किसी प्रकार का नियमित पद धारित नहीं करेंगी। उन्हीं के कथानुसार प्रथम दिन से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया गया था। जिसकी कईं माह बाद उन्होंने विश्वविद्यालय को विधिवत सूचना दी। देश व विदेश के किसी अन्य संस्थान में नौकरी के लिए आवेदन भी वह इस विश्वविद्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ही कर सकती थी। बिना गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय से विदेश में सेवा देने के लिए अनुमति प्राप्त किए व एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव (Extra Ordinary Leave) स्वीकृत कराए बिना किसी अन्य विश्वविद्यालय में समानांतर उनका पद ग्रहण करना धोखाधड़ी पूर्वक दो स्थानों पर नौकरी करने की श्रेणी में आता है । विदेश में नौकरी के लिए ऐसे एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लीव 5 वर्ष में एक बार ही देय होती है। जिसका वह उपभोग वो पहले ही कर चुकी थीं। सऊदी अरब में प्रथम दिन से ही एसोसिएट प्रोफेसर का पद ग्रहण कर लेने से उनका अध्ययन अवकाश स्वतः निरस्त हो जाता है।

उन्होंने स्वयं ही भारत लौटने पर उस अध्ययन अवकाश को निरस्त करने का आग्रह कर दिया था। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वह विभाग से विधिवत रिलीव हुए बिना ही विदेश प्रस्थान कर गई थी। एक मत से यह Willful absence from job की श्रेणी में आ सकता है।

सितंबर 2019 में सऊदी अरब में प्रस्थान करने के 2 माह पूर्व उन्होंने वर्किंग वीज़ा प्राप्त कर लिया था। उसके कारण विश्वविद्यालय को यह स्पष्ट शंका होती है कि प्रारंभ से ही उनकी नियुक्ति एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर हुई होगी। संभवतः इसे छिपाने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा बार-बार आग्रह करने पर भी सऊदी विश्वविद्यालय के ऑफर लेटर भी गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में प्रस्तुत नहीं किया। विश्वविद्यालय अब तक उनसे, उसे प्रस्तुत करने का आग्रह करता आ रहा है। इससे यह संशय होना भी स्वाभाविक है कि कहीं उनकी एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव के लिए पात्रता ना होने के कारण ही शोध अवकाश स्वीकृत कराया होगा। अन्यथा शोध के लिए अवकाश स्वीकृत कराकर प्रथम दिन से ही एसोसिएट प्रोफेसर पर कैसे पद स्थापन हो सकता है। उनके अवकाश के प्रयोजन को लेकर विश्वविद्यालय में प्रारंभ से ही असमंजस होने के कारण वर्तमान प्रभारी कुलसचिव जो उस समय उप कुलसचिव थे ने इसका संज्ञान लेकर टिप्पणी भी की थी। अब सऊदी अरब से लौटने के उपरांत उनके पुनः कार्यभार ग्रहण करने के संबंध में कोई निर्णय लेने के पूर्व प्रभारी कुलसचिव द्वारा उनसे दस्तावेजों की मांग की गई है। उनके यहां से जाने के पूर्व भी उप कुलसचिव के रूप में प्रभारी कुलसचिव श्री तिवारी, कुछ विसंगतियों को इंगित कर चुके थे। ऐसे में प्रभारी कुलसचिव श्री एस एन तिवारी पर 10 माह पूर्व की अवधि में कथित दुर्व्यवहार की शिकायत की गई है। विगत 10 माह की अवधि में और आज तक श्री तिवारी का शिकायतकर्ता अध्यापिका से प्रत्यक्ष अथवा पत्र, डाक , दूरभाष , ईमेल, एसएमएस अथवा व्हाट्सएप पर किसी भी प्रकार का कोई संपर्क नहीं रहा है। तथापि शिकायतकर्ता असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रति विश्वविद्यालय द्वारा पूर्ण सहानुभूति रखते हुए संपूर्ण प्रकरण को इस प्रकार के उत्पीड़न हेतु विहित आंतरिक शिकायत समिति को सौंप दिया गया है।

अतएव् जांच समिति की रिपोर्ट आने तक किसी प्रकार का अभिमत बनाने से पूर्व जांच समिति की रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर लेना समीचीन होगा।

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