ग्रेटर नोएडा,19 जनवरी। एक अध्ययन के अनुसार बहुत बड़ी संख्या में लोग गर्दन व पीठ दर्द कि समस्याओं से जूझ रहे हैं जिसमें 20 फ़ीसदी हिस्सा 16 से 34 वर्ष की आयु के लोगों का है। यह आंकड़ा निश्चित रूप से ऐसी गंभीर स्थिति की ओर इशारा करता है जिसमें बहुत बड़ा तबका युवा पीढ़ी का भी है। जीवनशैली में आये आधुनिक बदलाव भी इसके मूल कारणों में से एक हैं। समस्या की गंभीरता को समझते हुए जागरुकता के उद्देश्य से हाल ही में जेपी अस्पताल, नोएडा ने अपने परिसर की पहली मंजिल, ऑर्थोपेडिक्स ओपीडी में एक मुफ्त जांच शिविर का आयोजन किया, जहाँ जेपी अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ़ स्पाइन एंड डीफोर्मिटी करेक्शन के एग्जीक्यूटिव कंसल्टेंट डॉक्टर प्रमोद सैनी और डिपार्टमेंट ऑफ़ न्यूरोसर्जरी, नयूरो क्रिटिकल केयर एंड स्पाइन सर्जरी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉक्टर दिनेश रत्नानी ने लोगों को निशुल्क परामर्श दिए। शिविर में पीठ दर्द या सियाटिका, सर्वाइकल व लम्बर स्पोंडेलायसिस, स्कोलायसिस या मुड़ी हुई रीढ़, स्पाइन में फ्रैक्चर, ट्यूबरकुलोसिस स्पाइन, स्लिप डिस्क आदि के सम्बन्ध में परामर्श दिए गए। कार्यक्रम के आयोजन से 50 से अधिक लोग लाभान्वित हुए।
नियमित व्यायाम से स्ट्रेस को किया जा सकता है दूर
जेपी अस्पताल नोएडा के डॉक्टर प्रमोद सैनी, एग्जीक्यूटिव कंसल्टेंट, डिपार्टमेंट ऑफ़ स्पाइन एण्ड डीफोर्मिटी करेक्शन, ने कहा कि, “यह स्थिति चिंताजनक है कि आज की युवा पीढ़ी पीठ की समस्याओं की शिकार हो रही है, इसके लिए हमारी आज की भाग दौड़ भरी जीवनशैली भी ज़िम्मेदार है, जिसके चलते कामयाबी का दौर तो स्थापित हो चुका है लेकिन स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भी बरती जाती है। अपने भोजन में नियमित कैल्शियम व भरपूर विटामिन लें। रीढ़ व कमर के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी है नियमित व्यायाम करें, स्ट्रेच करें। साथ ही किसी भी प्रकार के दर्द को नज़रंदाज़ न करें। तुरंत संबंधित डॉक्टर की सलाह लें। क्योंकि समय से जांच व इलाज से जोखिम को रोका जा सकता है। मुझे उम्मीद है जेपी अस्पताल में आयोजित इस शिविर से लोग लाभान्वित होंगे और बेहतर स्वास्थ्य की और अग्रसर होंगे।
मोबाइल फोन व लगत तरीके से बैठना बन रहा है कारण
जेपी अस्पताल नोएडा के डॉक्टर दिनेश रत्नानी, एसोसिएट डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ़ न्यूरोसर्जरी, नयूरो क्रिटिकल केयर एंड स्पाइन सर्जरी, ने कहा कि, “पीठ का दर्द आज के दौर में काफी आम हो गया है, इसका मुख्य कारण ख़राब पोश्चर है, इसके अलावा नियमित व्यायाम न करना, कैल्शियम की कमी भी इसके कारक हैं। आजकल लोग मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप आदि का ज़रूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी करते हैं जिसके घातक परिणाम गर्दन, पीठ आदि के में दर्द और अन्य समस्याओं में निकलता है। ध्यान रहे कि पीठ दर्द की अधिकतर समस्याओं को दवाइयों और फीजियोथेरेपी आदि से ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसके अलावा कुछ ऐसे ख़तरनाक लक्षण होते हैं जिन्हें किसी भी स्थिति में नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता, जैसे पीठ का असहनीय दर्द पांवों की तरफ बढ़ने लगना, मल मूत्र आदि जाने में भी समस्या होना, पांवों में कमज़ोरी महसूस होना, यहाँ तक कि दर्द से बुखार अजाना, किसी चोट की वजह से असहनीय पीड़ा होना। ये तमाम ऐसी समस्याएं हैं जिनके नज़र आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ध्यान रहे अधिकतर केसेस में सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन कुछ मामलों में जिसमें डिस्क की जटिल समस्या शामिल होती है उसमें इसकी ज़रूरत पड़ती है। इन तमाम सर्जरी के परिणाम संतोषजनक होते हैं।
गलत पोजीशन से बैठना बन रहा है कारण
इसके अलावा घर व दफ्तरों में काम करने के दौरान एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने से परहेज़ करें, बीच बीच में ब्रेक लेते रहें। यहाँ यह भी ध्यान देना होगा कि गलत पोजीशन में बैठकर लैपटॉप, फ़ोन आदि का बढ़ता इस्तेमाल करना भी इस समस्या में इजाफा कर रहा है। कमर व पीठ में किसी तरह का झटका आजाना, चोट या दर्द जैसी समस्यों को नज़रंदाज़ न करें। और साथ ही ऐसी किसी भी स्थिति में वजन उठाने या भारी काम करने से परहेज़ करें।
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