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सभ्यता, संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था के लिए रामबाण होगी नयी शिक्षा नीति-रिपुदमन गौड़

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ग्रेटर नोएडा। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी देने की घोषणा की है।  नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भारत कि शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तर पर एक नया आयाम देती हुई दिखाई देती है ।  आज हम सब इस बात पर सहमत हो गए है कि नयी तकनिकी को अपनी भाषा में सीखा जा सकता है। पूर्व की शिक्षा नीति में भाषा की स्वायत्ता को सीमित करके रखा था वहीं अपनी अभिरुचि के अनुसार पाठ्यक्रमों के विकल्प भी काफी सिमित थे । देश की अर्थव्यवस्था व उद्योगों में नविनीकरण को बढ़ावा देने के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का नया प्रारूप भविष्य की शिक्षा को  ‘क्लोज्ड एंडेड करिकुलम’ से ‘ओपन एंडेड करिकुलम’ की ओर लेकर जायेगा । नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, मिडल और सेकंडरी लेवल पर सामयिक विषयों जैसे आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, एनवायर्नमेंटल एजुकेशन, ऑर्गेनिक लिविंग पर फोकस किया है। यह 21वीं शताब्दी की स्किल्स पर भी जोर दे रही है। रटने वाली लर्निंग को खत्म किया जाएगा वहीं ।  नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के फलस्वरूप एक ऐसी संस्कृति को जन्म मिलेगा जहाँ शिक्षा का उद्देशय अंक हासिल करना नहीं अपितु समाज में अपनी सहभागिता पैदा करना होग। शिक्षा निति के नए  प्रारूप में देश के शिक्षा वातावरण को और लचर बनाया गया है जिसमे विदेशी यूनिवर्सिटी देश में आएगी और उससे भारत का शिक्षा स्तर ग्लोबल होग और हम दुनिया की सर्वोच्च शिक्षा व तकनिकी में शामिल हो जायेंगे। प्राथमिक व उच्चतर प्राथमिक स्तर पर वोकेशनल शिक्षा को बढ़ावा देने से देश के युवाओं में उद्यमी  गुणों का विकास होगा जिससे देश आत्मनिर्भर भारत विज़न को प्राप्त कर पायेग। देश की व्यवस्था को सुधारने  के लिए देश की प्राइमरी एजुकेशन पर फोकस देना बहुत आवश्यक था जो कि नयी शिक्षा निति में दिया गया है।  हम सब एक सपना देखते आए है कि भारत एक बार फिर विश्व गुरु बनेगा जिसके लिए नयी राष्ट्रीय शिक्षा निति एक बहुत ही सराहनीय कदम है। यह सच है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति उम्मीदों की एक नयी किरण पैदा कर रही है वहीं इसका किर्यान्वय करना व इसको क्लास रूम तक ले जाना एक बहुत बड़ी चुनैती भी है । देश में आंगनवाड़ियों कि स्थिति बहुत ख़राब है उसपर ग्राउंड लेवल पर काम करने कि आवश्यकता है।  वोकेशनल एजुकेशन के लिए टीचर्स को भी क्वालिटी ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

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