प्रयागराज, 12 मई। उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक-संपन्न बनाने की दिशा में आज सैदाबाद ब्लॉक स्थित मॉडल प्राथमिक विद्यालय हकीम पट्टी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा चयनित मैनकाइंड कंपनी के सहयोग से विद्यालय में अत्याधुनिक डिजिटल क्लासरूम का अनावरण किया गया। यह कदम ग्रामीण अंचल के बच्चों को ‘स्मार्ट लर्निंग’ से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
अत्याधुनिक संसाधनों से लैस हुआ विद्यालय अनावरण कार्यक्रम के दौरान मैनकाइंड कंपनी के प्रतिनिधियों ने विद्यालय को डिजिटल उपकरणों की सौंपी गई खेप का प्रदर्शन किया। इस डिजिटल क्लासरूम की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: इंटरएक्टिव स्मार्ट बोर्ड: अब बच्चे पारंपरिक ब्लैकबोर्ड के बजाय बड़े टच-स्क्रीन बोर्ड पर चित्रों और एनीमेशन के माध्यम से कठिन विषयों को आसानी से समझ सकेंगे। ई-कंटेंट लाइब्रेरी: कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया ऑडियो-विजुअल पाठ्यक्रम, जो बच्चों की सीखने की रुचि को बढ़ाएगा।
प्रशिक्षण सत्र: अनावरण के पश्चात कंपनी के विशेषज्ञों द्वारा विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं समस्त स्टाफ को डिजिटल उपकरणों के संचालन की विस्तृत विधि बताई गई। शिक्षकों को सॉफ्टवेयर चलाने, ऑनलाइन कंटेंट एक्सेस करने और तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रधानाध्यापक का दृष्टिकोण: तकनीक और शिक्षा का संगम कार्यक्रम के दौरान प्रधानाध्यापक राजेश मिश्र ने डिजिटल क्लासरूम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह बदलाव केवल तकनीक का समावेश नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने का एक सशक्त माध्यम है। ”आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी का है। हमारे ग्रामीण परिवेश के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी थी तो बस सही संसाधनों की। डिजिटल क्लासरूम के माध्यम से अब हकीम पट्टी के छात्र भी किसी बड़े शहर के कॉन्वेंट स्कूल के समकक्ष खड़े होकर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। हमारा पूरा स्टाफ अब इस तकनीक के साथ बच्चों को ‘निपुण’ बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।” भविष्य की राह इस डिजिटल पहल से न केवल छात्रों के नामांकन (Enrolment) में वृद्धि होने की उम्मीद है, बल्कि ‘मिशन शक्ति’ और ‘निपुण भारत’ जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी गति मिलेगी। विद्यालय के शिक्षकों—महेंद्र कुमार, ज्ञान प्रकाश ,रुचि भटनागर और रिंकी यादव सहित पूरे स्टाफ—ने इस नई व्यवस्था के प्रति अपना उत्साह व्यक्त किया और इसे शिक्षण कार्य में क्रांतिकारी बदलाव बताया।
मॉडल प्राथमिक विद्यालय हकीम पट्टी में हुआ यह डिजिटल अनावरण यह संदेश देता है कि यदि सरकारी तंत्र और निजी संस्थाएं (जैसे मैनकाइंड) मिलकर प्रयास करें, तो परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है। अब हकीम पट्टी के नौनिहाल तकनीक की उंगली थामकर ज्ञान के नए क्षितिज की ओर बढ़ेंगे।
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