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सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. बनर्जी बी.एच. को नवीन रोटेटर कफ रिपेयर उपकरण के लिए भारतीय पेटेंट प्राप्त

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नवाचार से एंकर-रहित रोटेटर कफ रिपेयर का विकल्प उपलब्ध, विशेष रूप से कमजोर हड्डियों वाले मरीजों के लिए उपयोगी

बेंगलुरु/नई दिल्ली। एक चुनौतीपूर्ण सर्जिकल अनुभव को स्वदेशी चिकित्सा नवाचार में बदलते हुए, सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल, बेंगलुरु के एडिशनल डायरेक्टर – ऑर्थोपेडिक्स, डॉ. बनर्जी बी.एच. को उनके आविष्कार “Apparatus for Trans-Osseous Rotator Cuff Repair” के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया है । पेटेंट प्राप्त यह उपकरण पारंपरिक स्यूचर एंकर की बजाय हड्डी में बनाए गए टनल के माध्यम से रोटेटर कफ रिपेयर करने में सहायता के लिए डिजाइन किया गया है। यह तकनीक विशेष रूप से ऐसे मरीजों के लिए उपयोगी हो सकती है जिनकी हड्डियों की गुणवत्ता कमजोर है, जिसमें बुजुर्ग मरीज और ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित मरीज शामिल हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में पारंपरिक एंकर पर्याप्त मजबूती से पकड़ नहीं बना पाते।

पेटेंट प्राप्त नवाचार की शुरुआत

इस आविष्कार का विचार एक ऐसे मरीज के रोटेटर कफ रिपेयर के दौरान आया, जिसकी हड्डियों की गुणवत्ता काफी कमजोर थी। सर्जरी के दौरान डॉ. बनर्जी ने पाया कि हड्डी पारंपरिक एंकर को पर्याप्त पकड़ प्रदान नहीं कर पा रही थी। रिपेयर की गुणवत्ता से समझौता करने के बजाय उन्होंने एक वैकल्पिक तरीका तलाशना शुरू किया, जिसमें टेंडन को सीधे हड्डी के माध्यम से रिपेयर करने का प्रयास किया गया। यह अनुभव सफल रहा और इसी से डॉ. बनर्जी को ट्रांस-ओसियस रोटेटर कफ रिपेयर को सुविधाजनक बनाने वाले एक विशेष उपकरण के विकास की प्रेरणा मिली। लगभग तीन से चार वर्षों के दौरान इस नवाचार को विकसित और परिष्कृत किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में डॉ. बनर्जी के सर्जिकल अनुभव और क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पारंपरिक रोटेटर कफ रिपेयर में फटे हुए टेंडन को उसके मूल स्थान पर वापस सुरक्षित करने के लिए हड्डी में स्यूचर एंकर लगाए जाते हैं। हालांकि, जब हड्डी की गुणवत्ता कमजोर होती है, तो एंकर पर्याप्त मजबूती से पकड़ नहीं बना पाता, जिससे रिपेयर अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पेटेंट प्राप्त यह उपकरण सर्जनों को एक ऐसी वैकल्पिक फिक्सेशन तकनीक उपलब्ध कराता है जो पारंपरिक स्यूचर एंकर पर निर्भर नहीं होती।

यह उपकरण कैसे काम करता है

यह उपकरण हड्डी में टनल बनाने और उन्हें आपस में जोड़ने में सहायता करता है, जिसके माध्यम से स्यूचर को पास करके फटे हुए रोटेटर कफ टेंडन को सुरक्षित किया जा सकता है। ट्रांस-ओसियस तकनीक में कार्टिलेज के पास हड्डी में एक टनल बनाया जाता है और विशेष रूप से डिजाइन किए गए उपकरण की सहायता से इसे दूसरे टनल से जोड़ा जाता है। इसके बाद स्यूचर को इन टनल और टेंडन के माध्यम से पास किया जाता है, जिससे टेंडन को वापस हड्डी से सुरक्षित रूप से जोड़ा जा सके।

यह प्रक्रिया आर्थ्रोस्कोपिक तरीके से की जाती है। इसमें टनल को पहले हड्डी के अंदर मेडियल से लेटरल दिशा में बनाया और जोड़ा जाता है, जिसके बाद स्यूचर को पास कर रिपेयर पूरा किया जाता है।

संभावित क्लिनिकल लाभ

ट्रांस-ओसियस तकनीक का एक संभावित जैविक लाभ भी हो सकता है। हड्डी में टनल बनाने से रिपेयर साइट पर बोन मैरो के तत्वों का संपर्क हो सकता है, जिसमें ग्रोथ फैक्टर्स और स्टेम-सेल युक्त तत्व शामिल होते हैं। ये तत्व टेंडन और हड्डी के बीच होने वाली हीलिंग के लिए अनुकूल जैविक वातावरण बनाने में योगदान दे सकते हैं। चूंकि इस तकनीक में पारंपरिक स्यूचर एंकर की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए कुछ उपयुक्त मामलों में इम्प्लांट-आधारित फिक्सेशन पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे इम्प्लांट से संबंधित संभावित जटिलताओं से बचने में मदद मिल सकती है और लागत के स्तर पर भी संभावित प्रभाव पड़ सकता है।

सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल, बेंगलुरु के एडिशनल डायरेक्टर – ऑर्थोपेडिक्स एवं इस उपकरण के आविष्कारक, डॉ. बनर्जी बी.एच. ने कहा, “इस नवाचार का विचार एक ऐसे चुनौतीपूर्ण रोटेटर कफ रिपेयर के दौरान आया, जिसमें मरीज की हड्डियों की गुणवत्ता कमजोर थी और पारंपरिक एंकर फिक्सेशन चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। रिपेयर की गुणवत्ता से समझौता करने के बजाय मैंने टेंडन को हड्डी के माध्यम से सुरक्षित करने की संभावना तलाशने का निर्णय लिया। इसी अनुभव ने मुझे एक ऐसे उपकरण को विकसित और परिष्कृत करने के लिए प्रेरित किया, जो इस तकनीक को सुविधाजनक बना सके। पेटेंट प्राप्त होना मेरे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि यह ऑपरेशन थिएटर में सामने आई एक चुनौती से लेकर उसके संभावित समाधान तक की यात्रा को दर्शाता है। मेरा उद्देश्य सर्जनों को एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां कमजोर हड्डियों के कारण पारंपरिक एंकर-आधारित रिपेयर मुश्किल हो जाता है। साथ ही, मैं ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने में योगदान देना चाहता हूं।”

सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर, यूइची नागानो ने कहा, “डॉ. बनर्जी का पेटेंट प्राप्त उपकरण इस बात का एक मजबूत उदाहरण है कि किस प्रकार क्लिनिकल चुनौतियां स्वदेशी चिकित्सा नवाचार को जन्म दे सकती हैं। हम उन्हें इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई देते हैं और ऐसे चिकित्सक-नेतृत्व वाले नवाचारों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो मरीजों की देखभाल को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।”

सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर, केई इयामा ने कहा, “डॉ. बनर्जी का यह नवाचार दर्शाता है कि क्लिनिकल चुनौतियां किस प्रकार ऐसे व्यावहारिक समाधानों को जन्म दे सकती हैं, जिनमें मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने की क्षमता होती है। यह पेटेंट सकरा के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है और चिकित्सकों के नेतृत्व वाले रिसर्च एवं इनोवेशन को समर्थन देने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।”

ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, लोकेश कुमार फासु ने कहा, “यह पेटेंट हमारे हेल्थकेयर इकोसिस्टम में स्वदेशी चिकित्सा नवाचार को प्रोत्साहित करने के महत्व को दर्शाता है। हम अपने चिकित्सकों को क्लिनिकल प्रैक्टिस से प्राप्त अनुभवों और विचारों को ऐसे समाधानों में बदलने के लिए सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो मरीजों की देखभाल को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।”

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