" data-ad-slot="">

सीता नवमी: जनकसुता के जीवन से नारी गौरव का संदेश

" data-ad-slot=""data-auto-format="rspv" data-full-width>
" data-ad-slot=""data-auto-format="rspv" data-full-width>
" data-ad-slot=""data-auto-format="rspv" data-full-width>

ग्रेटर नोएडा | भगवत प्रसाद शर्मा की कलम से

भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक परंपरा-प्रवाह में ‘सीता नवमी’ का पर्व नारी शक्ति, मर्यादा और त्याग के आदर्श स्वरूप माता सीता के दिव्य प्राकट्य का स्मरण कराता है। मिथिला के राजा जनक के यज्ञ-क्षेत्र से उत्पन्न जनकसुता सीता को भूमि देवी का अंशावतार माना जाता है, जिनका जीवन धर्म, धैर्य और आत्मबल का जीवंत प्रतीक है। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा वर्णित “सिय राममय सब जग जानी” जैसी पंक्तियाँ माता सीता के उस आदर्श स्वरूप को रेखांकित करती हैं, जिसमें संपूर्ण सृष्टि को राम-सीता मय माना गया है। यह केवल भक्ति भाव नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन और समरसता का दार्शनिक संदेश भी है। वनगमन के कठिन प्रसंग में माता सीता का प्रभु श्रीराम के साथ चलने का निर्णय भारतीय नारी की स्वाधीन चेतना और अटूट निष्ठा का प्रतीक है। उनका यह भाव—“प्राणनाथ तुम्ह बिनु जग माहीं” केवल प्रेम नहीं, बल्कि आत्मिक एकत्व और समर्पण की उच्चतम अभिव्यक्ति है। अशोक वाटिका में रावण के समक्ष उनका अडिग आत्मसम्मान भारतीय इतिहास में नारी गरिमा की सबसे सशक्त मिसाल माना जाता है। विपरीत परिस्थितियों में भी उनका धैर्य और मर्यादा यह संदेश देता है कि नारी केवल कोमलता नहीं, बल्कि अपराजेय आत्मबल का स्वरूप भी है। तुलसीदास का कथन “धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परखिए चारी” नारी की महत्ता को जीवन के आधार स्तंभों में स्थापित करता है। माता सीता का जीवन इस कथन की सर्वोच्च व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। आज के आधुनिक संदर्भ में ‘सीता नवमी’ केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का उत्सव भी है। यह पर्व नारी सशक्तिकरण को नैतिकता, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़ने का संदेश देता है। माता सीता का जीवन यह स्पष्ट करता है कि नारी केवल अधिकारों की मांग नहीं, बल्कि संस्कार, साहस और गरिमा की वाहक भी है। संस्कृत का शाश्वत वाक्य “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” आज भी सामाजिक संतुलन का आधार है। अतः यह पर्व हमें आत्ममंथन का अवसर देता है कि समाज में नारी को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर वास्तव में किस सीमा तक प्राप्त हैं। सीता नवमी का यह पावन अवसर हमें संकल्पित करता है कि हम माता सीता के आदर्शों को केवल स्मरण न करें, बल्कि उन्हें अपने जीवन और व्यवहार में आत्मसात करें। यही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता है और यही भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
जय सिया राम।

✍️ लेखकः-
@सर्वाधिकार सुरक्षित
भगवत प्रसाद शर्मा
मीडिया एक्जीक्यूटिव
भारतीय जनता पार्टी
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
9582782750

Spread the love
Samvad Express

Samvad Express is a News Portal Digital Media.

Recent Posts

इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (IBA) ने यथार्थ अस्पताल के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किया समझौता

ग्रेटर नोएडा। इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (आईबीए) ने उद्यमियों, श्रमिकों एवं कर्मचारियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता…

21 hours ago

सेंट जोसेफ स्कूल के इन्वेस्टिचर सेरेमनी में बच्चों को आदर्श नेता, ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के लिए किया गया प्रेरित

ग्रेटर नोएडा। सेंट जोसेफ स्कूल, ग्रेटर नोएडा में शनिवार को इन्वेस्टिचर सेरेमनी का आयोजन किया…

21 hours ago

एक्यूरेट इंस्टीट्यूट में AKMUN 2026 के मॉडल यूनाइटेड नेशंस सम्मेलन में प्रतिभाशाली छात्रों ने अपनी प्रतिभा का किया प्रदर्शन

ग्रेटर नोएडा। एक्यूरेट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी ने एकेएमयूएन 2026 के लिए वेन्यू पार्टनर…

22 hours ago

जी डी गोयंका पब्लिक स्कूल में प्रतिभा सम्मान समारोह का हुआ आयोजन, बच्चे हुए सम्मानित

ग्रेटर नोएडा। जी.डी. गोयंका पब्लिक स्कूल, स्वर्ण नगरी, ग्रेटर नोएडा में शनिवार को विद्यार्थियों की…

22 hours ago

एनआईईटी में ऑटोडेस्क एवं आईसीटी एकेडमी के इंडिया डिजाइन वीक–2026 के ग्रैंड फाइनल का आयोजन

ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय इंडिया डिजाइन…

2 days ago

कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज में “रोगी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता” पर शिक्षण सत्र आयोजित

ग्रेटर नोएडा ।  कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज में दिनांक 22 अप्रैल 2026…

4 days ago
" data-ad-slot=""data-auto-format="rspv" data-full-width>