राज्य स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता का हुआ समापन..जीतने वाली टीम को अर्जुन अवार्डी वरुण भाटी व प्रधानाचार्य ने खिलाड़ियों को किया सम्मानित

State level Kho-Kho competition concluded. Arjuna Awardee Varun Bhati and Principal honoured the winning team and players.

ग्रेटर नोएडा। सेंट जोसेफ वि‌द्यालय सेक्टर अल्फा वन ग्रेटर नोएडा में चल रही “सीआईएससीई बालक वर्ग की राज्य स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता के दूसरे व अंतिम दिन गुरुवार को  सेमी फाइनल व फाइनल मुकाबले खेले गए। प्रतियोगिता के खिताबी मुकाबले में 14 वर्ष से कम उम्र सीमा में कानपुर दक्षिण एवम् गाजियाबाद के बीच हुआ। 17 वर्ष से कम उम्र सीमा में कानपुर उत्तर व कानपुर दक्षिण के बीच हुआ। 19 वर्ष से कम उम्र में भी कानपुर दक्षिण व कानपुर उत्तर के बीच ही हुआ। 14 वर्ष से कम उम्र में गाजियाबाद ने प्रथम, कानपुर दक्षिण ने द‌वितीय, कानपुर उत्तर ने तृतीय एवम् वाराणसी ने चतुर्थ स्थान बनाया। 17 वर्ष से कम उम्र में कानपुर दक्षिण ने प्रथम, कानपुर उत्तर ने द्वितीय, गाजियाबाद ने तृतीय एवम् मेरठ ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया। 19 वर्ष में कम उम्र में कानपुर दक्षिण ने प्रथम, कानपुर उत्तर ने द्वितीय, लखनऊ दलिग ने तृतीय एवं गाजियाबाद ने चतुर्थ स्थान के खिताबी मुकाबले जीते।

State level Kho-Kho competition concluded. Arjuna Awardee Varun Bhati and Principal honoured the winning team and players.

प्रधानाचार्य फादर जिप्सन पलाटी ने सभी जीतने वाली टीमों को ट्राफी देकर सम्मानित किया तथा जीत की बधाई दी। उपखिताबी (सेमीफाइनल) व खिताबी (फाइनल) मुकाबले खेले गये। प्रतियोगिता में 14 वर्ष से कम उम्र सीमा (उपखिताबी) में कानपुर दक्षिण व वाराणसी, जिसमें कानपुर दक्षिण की टीम 7 अंक से विजयी रही। कानपुर उत्तर व गाजियाबाद, जिसमें गाजियाबाद की टीम 1 अंक में विजयी रही। 17 वर्ष से कम उम्र सीमा (उपखिताबी ) में गाजियाबाद व कानपुर दक्षिण, जिसमें कानपुर दक्षिण की टीम 12 अंक से विजयी रही। मेरठ व कानपुर उत्तर, जिसमें कानपुर उत्तर की टीम 3 अंक में विजयी रही। 19 वर्ष से कम उम्र सीमा (उपखिताबी)  गाजियाबाद व कानपुर उत्तर, जिसमें कानपुर उत्तर की टीम 1 अंक में विजयी रही। लखनऊ दक्षिण व कानपुर दक्षिण, जिसमें कानपुर दक्षिण की टीम 7 अंक में विजयी रही। प्रधानाचार्य ने कहा कि जीवन की हर यात्रा पहले एवम् छोटे से कदम से शुरू होती है जिसमें अनेको पड़ाव मिलते हैं, किसी पड़ाव में मिले विश्राम में ये नहीं मानना चाहिए कि ये मात्रा का अंत है। इस समापन अवसर पर पैरालंपिक में कास्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले वि‌द्यालय के पूर्व छात्र वरुण सिंह भाटी ने पधार कर समापन कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए तथा खिलाडियों को अपने हाथों से पदक दिया।

 

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