नोएडा। हम अप्रत्याशित दौर में जी रहे हैं तथा वक्त की मांग है सबसे पहले हमें सेहत व स्वास्थ्य को महत्व देना होगा। अस्थमा बिगड़ने का मुख्य कारण श्वास की नली में वायरल संक्रमण होना है। अस्थमा के जोखिम वाले लोगों या फिर मौजूदा अस्थमा पीड़ितों के लिए सांस की नली में वायरल संक्रमण बहुत घातक हो सकते हैं और बीमारी को अनियंत्रित कर सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार सामान्य या फिर गंभीर अस्थमा के मरीजों को बीमारी के और ज्यादा गंभीर होने का खतरा ज्यादा होता है। भारत में लगभग 93 मिलियन लोग सांस की क्रोनिक समस्या से पीड़ित हैं; इनमें से लगभग 37 मिलियन एस्थमेटिक हैं। अस्थमा के वैश्विक भार में भारत का हिस्सा केवल 11.1 प्रतिशत है, जबकि विश्व में अस्थमा से होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा 42 प्रतिशत है, जिस वजह से भारत दुनिया की अस्थमा कैपिटल बन गया है।
डॉक्टर रोहित करोली – कंसलटेंट स्पेशलिस्ट – चेस्ट मेडिसिन, क्रिटिकल केयर मेडिसिन एंड स्लीप मेडिसिन, अपोलो हॉस्पिटल के अनुसार, ‘‘अस्थमा पर सांस के वायरस के प्रभाव के चलते यह बहुत आवश्यक हो गया है कि मौजूदा समय में अस्थमा पीड़ित बहुत ज्यादा सावधानी बरतें। अस्थमा पीड़ितों को अस्थमा नियंत्रित रखने के लिए स्टेरॉयड इन्हेलर्स दिए जाते हैं। मौजूदा महामारी में अस्थमा पीड़ित के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने अस्थमा को नियंत्रित रखे। स्टेरॉयड इन्हेलर्स का उपयोग रोकने से व्यक्ति को अस्थमा के बिगड़ने का खतरा होगा। मौजूदा महामारी के समय में किसी बीमारी के उपचार के लिए आपातकालीन विभाग या अत्यावश्यक इलाज के लिए जाना पड़ता है जहां पर मरीज को किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने का जोखिम भी ज्यादा होता है। इसलिए अस्थमा को नियंत्रित रखकर अस्थमा पीड़ित व्यक्ति वायरल संक्रमण के जोखिम को कम कर सकता है। अस्थमा पीड़ितों को कभी भी अपने कॉर्टिकोस्टेरॉयड इन्हेलर तब तक लेना बंद नहीं करना चाहिए, जब तक कोई मेडिकल प्रोफेशनल उनसे ऐसा करने को न कहे। स्टेरॉयड इन्हेलर का प्रयोग बंद करने से मरीज को संक्रमण का ज्यादा खतरा हो जाता है।
एस्थमेटिक मरीजों को बिना योजना के क्लिनिक नहीं जाना चाहिए। यद्यपि अस्थमा खांसी और सांस लेने में तकलीफ से जुड़ा है, लेकिन इसमें बुखार नहीं आता है। यदि अस्थमा में बुखार आ रहा है, तो डॉक्टर से फौरन संपर्क करें । सामान्य से गंभीर अस्थमा से पीड़ित लोगों को वायरल संक्रमण से बहुत ज्यादा बीमारी पड़ने का खतरा रहता है। ये संक्रमण आपकी सांस की नली (नाक, गला, फेफड़ों) को प्रभावित करते हैं, अस्थमा का अटैक लाते हैं और इनकी वजह से निमोनिया या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिज़ीज़ हो सकती है। एक्यूट लक्षणों से आराम के लिए स्पेसर के साथ एमडीआई का उपयोग किया जा सकता है। नेबुलाईज़र्स का उपयोग करने से बचें क्योंकि उनमें वायरल संक्रमण फैलने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। नेबुलाईज़र्स एयरोसोल्स बनाते हैं, जो संक्रमित ड्रॉपलेट्स को कई मीटर तक फैला सकते हैं। वायरल संक्रमण के और ज्यादा मामले सामने आने तथा समुदायों द्वारा बीमारी को फैलने से रोकने के उपाय करने के साथ लोगों का चिंता व तनाव से ग्रसित होना स्वाभाविक है। तीव्र भावनाएं अस्थमा के अटैक को बढ़ा सकती हैं। इसलिए खुद को चिंता व तनाव से मुक्त रखने के उपाय करें। मौजूदा स्थिति में अस्थमा पीड़ितों के लिए सबसे अच्छा यही है कि वो अपने अस्थमा को नियंत्रित रखें। कंट्रोलर मेडिकेशन रोकने से व्यक्ति का अस्थमा गंभीर होने का जोखिम बढ़ जाएगा, खासकर तब जब हम स्प्रिंग के एलर्जी के मौसम में प्रवेश कर रहे हैं।
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