रबूपुरा। पटाखों की बिक्री व चलाने पर प्रतिबंध के बावजूद कस्बा व देहात क्षेत्र में लोगों की मनमानी ने हवा में खूब जहर घोला। प्रशासनिक दावों एवं पर्यावरण के हालातों को अनदेखा कर चारों तरफ जमकर आतिशबाजी की गई तथा स्थानीय प्रशासन व एनजीटी नियमों का पालन कराने में पटाखा माफियाओं और लोगों के आगे एक बार फिर नतमस्तक नजर आए। दीपावली व गौवर्धन पूजा के दौरान दोनों दिन लगातार हुई भयंकर आतिशबाजी ने पर्यावरण को धुंध में लपेट दिया। हालांकि शाम के समय तेज हवा के साथ हुई बारिश ने हल्की राहत जरूर दी लेकिन फिर आबोहवा काफी खतरनाक रही। वहीं जहां पुलिस पटाखा बिक्री नहीं होने के दावे करती रही तो दूसरी तरफ कस्बे में करीब आधा दर्जन माफियाओं द्वारा मनमानी कीमत पर पटाखों की बिक्री धड़ल्ले से की जाती रही। सूत्रों के मुताबिक प्रशासन द्वारा भले ही एनसीआर में आतिशबाजी बिक्री के लिए अनुमति प्रदान नहीं की गई लेकिन कई पटाखा बिक्रेता अपने घर से पटाखे बेचते रहे तो कई माफियाओं ने घरों में होम डिलीवरी की। दोनों दिन इस आंख मिचौली के खेल में कस्बा समेत पूरे क्षेत्र में पुलिस गश्त मात्र औपचारिकता पूर्ण नजर आई।
दुकानदार और आतिशबाजों का पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाने का सिलसिला शनिवार शाम से शुरू होकर रविवार देर रात तक चलता रहा। शाम होते ही तेज पटाखों के चलाने का सिलसिला शुरू हो गया था। कई लोगों ने पटाखे ने मिलने की स्थिति में देसी बम खरीद पर चलाएं। बताया जाता है कई आतिबाजी वालों ने देशी बम भी बेचे हैं। जिससे लगता है कि पटाखे जलाने के शौकीन व आतिशबाजी माफियाओं पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध, एनजीटी के नियमों, पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था व पर्यावरण को सुरक्षित रखने की अपील का कोई असर नही हुआ। उधर सूत्रों का दावा है कि जहाँ पुलिस कस्बे में आतिशबाजी नहीं बिकने का हवाला देती रही तो दूसरी तरफ कुछ पुलिसकर्मियों की सरपरस्ती में खुलेआम पटाखा बिक्री होती रही।
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