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जीबीयू के प्रो. एस.के. सिंह नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन हेतु यूपी सरकार द्वारा गठित समिति के सदस्य हुए मनोनीत

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ग्रेटर नोएडा,16 अगस्त। हाल ही में भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति-2020 की घोषणा की है। ज़्यादातर शैक्षिक संस्थानों और उनसे सम्बंधित शिक्षाओं ने सरकार के इस पहन को एक महत्वपूर्ण कदम माना ही नहीं बल्कि सराहा भी है। देश में 1986 के बाद अर्थात् 34 वर्षों बाद सरकार ने देश की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक शैक्षणिक प्रणाली समानांतर लाने का प्रयास किया गया है। शैक्षिक वर्ग सरकार के इस प्रयास को भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विश्व-पटल पर लाने का कदम माँ रही है और उनके अन्यूज़बल यह एक मिल का पत्थर साबित होगा। इसे कार्यान्वित करने हेतु सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार को भेजा गया है। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन हेतु उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र हेतु अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में एक स्टीयरिंग समिति का गठन किया है जिसमें अध्यक्ष के अलावा कूल 16 सदस्य हैं जो राज्य के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से सम्बंधित हैं। इन में से एक सदस्य प्रो सुरेंद्र कुमार सिंह हैं जो गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नॉएडा में अधिष्ठाता लॉ, जस्टिस एवं गवर्नन्स तथा बौध अध्ययन संकाय हैं। वह एक अनुभवी प्रोफेसर हैं जो उच्च शिक्षा में कई प्रशासनिक पदों पर पहले भी रह चुके हैं। उनकी विशेषज्ञता गैर-लाभकारी संगठनों, व्याख्यान, संपादन, पाठ्यक्रम विकास और सार्वजनिक भाषण में कुशलता है। लखनऊ विश्वविद्यालय से बिजनेस लॉ में उन्होंने पीएचडी डिग्री हासिल की है और इस क्षेत्र के काफ़ी जाने माने विद्वान है और यही वजह की की वो पूर्व में मध्य प्रदेश भोज विश्वविद्यालय, भोपाल एवं रामा विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति भी रह चुके हैं। वैसे इनकी शिक्षा-दीक्षा मुख्यतः विधि (लॉ) विषय में रही है और लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बंधित रहे हैं। जीबीयू के कुलपति प्रो भगवती प्रकाश शर्मा को जब यह जानकारी दी गयी तो उन्होंने ने उन्हें इतने महत्वपूर्ण समिति के सदस्य मनोनीत होने के लिए बधाई दी। उनके इस समिति में शामिल होने से विश्वविद्यालय में हर्ष का माहौल है। इसी क्रम में कुलपति गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने कहा कि नई शिक्षा नीति देश की शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा देगी जो आज के समय की माँग भी है और इसके तहत भारतीय शिक्षक ही नहीं छात्र भी विश्व की अन्य देशों के शिक्षक एवं छात्रों के समकक्ष खड़े हो सकेंगे और दूसरी सब से बड़ी बात जो इस शिक्षा नीति से निकल कर आयी है वो है शोध पत्रों आदि में काभी उत्कृष्टा आयेगी।

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