जीबीयू में प्राचीन ज्ञान, सभ्यता के पुरावशेष और वर्तमान विश्व के परिदृश्य’ विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

ग्रेटर नोएडा,31 जनवरी। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के प्रांगण में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय  और कुमारी मायावती गवर्मेंट गर्ल्स पी.जी.कॉलेज,बादलपुर के संयुक्त तत्त्वाधान में ‘प्राचीन ज्ञान, सभ्यता के पुरावशेष और वर्तमान विश्व के परिदृश्य’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में प्रो.श्वेता आनंद, शैक्षणिक अधिष्ठाता, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने स्वागत भाषण दिया तत्पश्चात् जीबीयू तथा महामाया कॉलेज का परिचय देते हुए प्रो.दिव्या नाथ, प्रिंसिपल, के.एम.जी.जी.पी.जी.सी ने कहा कि हमारे देश की प्राचीनता को जानने का सबसे उत्तम माध्यम इतिहास है।

सम्मेलन के विषय पर डॉ. किशोर कुमार ने संक्षिप्त प्रकाश डाला।वियतनाम विश्वविद्यालय, हुए से पधारे डॉ. थिच न्यूवेन डट ने वीयतनाम वि.वि. के कुलपति के संदेश से सबको अवगत कराया । जे.नंदकुमार,राष्ट्रीय संयोजक, प्रज्ञा-प्रवाह ने भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान को परा-अपरा विद्या से जोड़ा। अतिथि महेश चंद शर्मा (चेयरमैन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन फॉर इंटीग्रल ह्यूमेनिज़्म, ए.बी.आर.एस.एम.) के  सीविलाइजेशन का अर्थ प्राचीन मनीषी से जोड़ा न कि सभ्यता से और कहा कि “सत्य वदं, धर्मम् चर, स्वाध्याय प्रवद भारतीय संस्कृत्ति का सत्य है और सत्य का हम अनुभव करते हैं तथा सत्य हमारे अंदर है” ।

अध्यक्षीय भाषण में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा प्राचीन प्रज्ञा में संसार के सभी ज्ञान को निहित माना तथा विभिन्न संग्रहालयों में अपठित लगभग सवा करोड़ पाण्डुलिपियों को पढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता ने सभी अतिथियों को स्क्रोल तथा नटराज मूर्ति से सम्मानित किया। अंत में डॉ. विनोद कुमार शानवाल (विभागाध्यक्ष, एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ) धन्यवाद ज्ञापन दिया। उद्घाटन सत्र के बाद पैनल डिस्कशन भी हुआ जिसमें महेश चन्द शर्मा, प्रो. वेद प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. शकुन्तला नागपाल, डॉ. थिच न्यूवेन डट, प्रो.संगीत रागी ने सभा में रोचक विमर्श पैदा किया। यह ध्यातव्य है कि इन तीन दिनों में कुल 15 सत्र चलेंगे। जिसमें देश-विदेश से पधारे विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं । विदेशी विश्वविद्यालयों में से वीयतनाम विश्वविद्यालय के सबसे अधिक विशेषज्ञों की भागीदारी है।

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