ग्रेटर नोएडा। शारदा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बेसिक साइंस एण्ड रिसर्च, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी और रिसर्च एण्ड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा “कम्प्यूटेशनल गैस्ट्रोनॉमी” पर एक सेमिनार का आयोजन किया। इन्द्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, दिल्ली के कम्प्यूटेशनल गैस्ट्रोनॉमी के नए और उभरते क्षेत्र के मुख्य वास्तुकार प्रोफेसर (डॉ.) गणेश बागलर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। उनका स्वागत डीन (अनुसंधान) और निदेशक,आरटीडीसी डॉ. एच.एस.पी. राव, ने किया। प्रो. बागलर ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारतीय व्यंजन सबसे विविध और जटिल हैं। इओन्स से लेकर आधुनिक समय तक भोजन तैयार करना और परोसना भारतीय लोकाचार के केंद्र बिंदु पर रहा है। महाराजाओं से लेकर आम जनता तक शेफ्स की जय-जयकार होती है। हमारे पकवान विशिष्ट भोजन के क्षेत्र में आते हैं, जिसकी तैयारी समर्पित महिलाओं और पुरुषों द्वारा सूक्ष्म स्तर के प्रयोगों के माध्यम से की जाती है। भारत में भोजन, पोषण, संस्कृति, और विरासत बारीकी से जुड़े हुए हैं। जो अणु हमारे भोजन बनाते हैं, उनमें से 25,000 से अधिक, और उनकी संरचना, सांद्रता और तालमेल कम्प्यूटेशनल रूप से मानव मुंह में मौजूद 35 रिसेप्टर एंजाइमों के साथ मैप किए जाते हैं, हमारे पास कम्प्यूटेशनल गैस्ट्रोनॉमी है। भोजन और जायके को आणविक अवयवों तक उबाला जा सकता है। कम्प्यूटेशनल अध्ययन से बैकअप के साथ उनके क्रॉस-कॉम्बिनेशन से नए और बेहतर खाद्य पदार्थ मिलेंगे, जिनमें उच्च पोषण मूल्य और बेहतर स्वाद होगा। सेमिनार में डीन (एस.इ.टी.) प्रो. परमानंद के अलावा, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, खाद्य-प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग के संकाय मौजूद थे।
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