-शारदा विवि में साइकोसेक्सुअल डिसऑर्डर- भारतीय परिपेक्ष्य विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला
ग्रेटर नोएडा,8 दिसम्बर। शारदा विश्विद्यालय के स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के मनोरोग चिकित्सा विभाग के द्वारा चिकित्सा शिक्षा में निरंतर वृद्धि के लिए मनोवैज्ञानिक विकारों पर थीम, साइकोसेक्सुअल डिसऑर्डर- भारतीय परिपेक्ष्य विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. आर. सी. जिलोहा मुख्य अतिथि और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. एम. एन. थरेजा, सफदरजंग अस्पताल दिल्ली के मनोरोग चिकित्सा के विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज वर्मा, किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ के मनोरोग चिकित्सक डॉ. आदर्श त्रिपाठी, सुभारती मेडिकल कॉलेज, मेरठ के मनोरोग चिकित्सक डॉ. विवेक कुमार, मुज़फ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के मनोरोग चिकित्सा के विभागाध्यक्ष डॉ. गौतम आनंद और राजकीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान, ग्रेटर नोएडा के विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, शारदा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष निरंजन सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचारों से उपस्थित सभी का ज्ञान वर्धन कराया। उक्त कार्यक्रम के उत्तर प्रदेश मेडिकल फैकल्टी ने शारदा विश्वविद्यालय को चार क्रेडिट घंटे का भी आवंटन किया है। शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस एण्ड रिसर्च के प्रो. वाईस चांसलर डॉ. पी.एल. कोरिहोलू, मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. मनीषा जिंदल, एसोसिएट डीन डॉ. पूजा रस्तोगी, मेडिकल सुपरिन्टेन्डेन्ट डॉ. आशुतोष निरंजन, स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस एण्ड रिसर्च के मनोरोग चिकित्सा के विभागाध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार तथा कार्यक्रम के संयोजक डॉ. निखिल नायर, डॉ. श्रुति शर्मा के साथ विभाग के अन्य चिकित्सक और दिल्ली एनसीआर से आये 250 राष्ट्रीय स्तर के मनोचिकित्सकों ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि और वक्ताओं का स्वागत शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस एण्ड रिसर्च के प्रो. वाईस चांसलर डॉ. पी.एल. कोरिहोलू, मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. मनीषा जिंदल, और मनोरोग चिकित्सा के विभागाध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार ने किया। इस सेमिनार में पुरुष मनोवैज्ञानिक विकार, यौन विकारों में भारतीय इतिहास का योगदान, पोर्नोग्राफी, पैराफिलिया सेक्स और हस्तमैथुन की लत, आम यौन मिथक और उनके स्पष्टीकरण का साइकोसेक्सुअल क्लिनिक से निवारण, यौन स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता, मनोवैज्ञानिक विकारों में मेटाबोलिक की भूमिका और सामान्य अस्पताल में मनोवैज्ञानिक विकारों में रेफरल पैटर्न विषयों पर चर्चा की गई। मुख्य रूप से यही निष्कर्ष निकाला गया की यौन विकारों के लिए लोगों में झिझक ही इस समस्या का मुख्य कारक है। खासकर भारत जैसे देश में अभी भी लोग यौन सम्बन्धी विकारों पर चर्चा करने से कतराते हैं जिसके कारण छोटी से समस्या भी कई बार विकराल रूप ले लेती है।
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