ग्रेटर नोएडा,14 नवम्बर। शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ डेंटल साइंसेज ने डेंटल कॉलेजों में रैगिंग के खतरे को रोकने पर एक सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य डॉ अनिल कुमार चांदना मुख्य अतिथि थे। उनके अतिरिक्त शारदा विश्वविद्यालय के छात्रावास विभाग तथा सुरक्षा अधिकारी शामिल थे। इसमें रैगिंग रोकने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा किया गया। सभी मेहमानों का स्वागत स्कूल ऑफ़ डेंटल साइंसेज के डीन डॉ. एम. सिद्धार्थ ने किया। डॉ. चांदना ने बताया की रैगिंग हिंसा एक कारण है जिसके कारण छात्र अपमानित महसूस करते है। इससे चिंता और डिप्रेशन जैसे प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। हमारे देश में इसके खिलाफ अथक उपायों के बावजूद रैगिंग की संस्कृति कायम है। जबकि कानून और व्यवस्था लागू है, संस्थानों को छात्रों को सुरक्षा की भावना प्रदान करने के लिए पहल करनी चाहिए। कॉलेजों में काउंसलिंग सेल होने चाहिए जो छात्रों को संकट के समय मदद कर सकें। यदि विश्वविद्यालयों द्वारा स्वस्थ प्रथाओं को अपनाया जाता है, तो फ्रेशर्स के बीच रैगिंग का डर कम हो सकता है। रैगिंग के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एंटी-रैगिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। एंटी-रैगिंग छात्र समिति यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है कि यह रैगिंग मुक्त परिसर है। परामर्श सेवाएं स्वायत्त होनी चाहिए ताकि छात्रों की गोपनीयता बनाए रखी जा सके और वे बिना किसी हिचकिचाहट के मदद ले सकें।
शारदा विश्विद्यालय के स्कूल ऑफ़ डेंटल साइंस के डीन डॉ. एम. सिद्धार्थ ने भी अपने विद्यार्थियों को समझाया की सभी छात्रों को यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वे किसी भी प्रकार के रैगिंग में संलग्न होने से प्रतिबंधित हैं। किसी भी छात्र या छात्रों द्वारा किसी भी आचरण, चाहे वह बोले या लिखे गए शब्दों या किसी ऐसे कार्य से हो, जिसमें किसी नए या किसी अन्य छात्र के साथ अशिष्टता के साथ छेड़छाड़ करना या किसी अन्य छात्र या छात्रों द्वारा उपद्रवी या अनुशासनहीन गतिविधियों में लिप्त होने का प्रभाव होता है। रैगिंग कोई सभ्य संस्कार नहीं है लेकिन यातना का एक अनुष्ठानिक रूप है जो गंभीर मनोवैज्ञानिक और शारीरिक चोट का कारण बन सकता है। रैगिंग ने कई निर्दोष लोगों की जान ले ली है और इतने उज्ज्वल करियर को बर्बाद कर दिया है, यह शायद दुनिया में एकमात्र सामाजिक और मानवाधिकार समस्या है जिसमें पीड़ित स्वयं अपराध का अपराधी बन जाता है। यह समझ से परे है कि जिस पीड़ित को बुरी तरह से तड़पाया जाता है, वह थोड़े ही समय में रैगिंग को अपना सर्वश्रेष्ठ पल बना लेता है और अपने कनिष्ठों पर उसी रीति-रिवाज को मानना और उसका अभ्यास करना शुरू कर देता है ।
ग्रेटर नोएडा। इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) के प्रतिनिधिमंडल ने आज जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर श्रीमती…
क्वीन्स कार्मेल स्कूल में स्नेह, संस्कार और परंपराओं के साथ मनाया गया ग्रैंडपेरेंट्स डे ग्रेटर…
ग्रेटर नोएडा। कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज, ग्रेटर नोएडा में विश्व रोगी सुरक्षा…
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, के.पी.-III, ग्रेटर नोएडा, अपनी प्रिय प्रधानाचार्या दिवंगत डॉ. हीमा…
विषय-फार्मास्यूटिकल अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा अभ्यास में एआई की उभरती भूमिकाएँ: आगामी चुनौतियाँ पर हुई…
- 1,000 से अधिक मातृशक्ति की सहभागिता के साथ ‘नारी शक्ति राष्ट्र वंदन यज्ञ’ से…