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बौध अध्ययन एवं बुद्धिज्म के कोर्स के लिए जीबीयू और विदेश मंत्रालय ने मिलाया हाथ

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ग्रेटर नोएडा,11 फरवरी। विदेश मंत्रालय की विदेशों में आईटीईसी कार्यक्रम को चलाता है। यह कार्यक्रम भारत की कूटनीति के लिए काफ़ी सहायक साबित हुई है जिसके तहत विदेशों के सिविल सेवकों भारत और भारत की संस्कृति से परिचित करवाते हैं और उसमें उनके पसंद और जुड़ाव की वजह से काफ़ी सफल कार्यक्रम है। वर्तमान में कोविड प्रतिबंधों के कारण ऑनलाइन प्रारूप के माध्यम से आईटीईसी कार्यक्रम प्रचारित की जा रही है। मंत्रालय को आसियान देशों के सिविल सेवकों के लिए आईटीईसी में बौद्ध धर्म और बौद्ध अध्ययन से संबंधित पाठ्यक्रमों को शामिल करने के निर्देश मिले थे। कार्यक्रम का समग्र उद्देश्य दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों (आसियान) के साथ बौद्ध धर्म के पहलुओं के साथ भारत के बौद्ध संबंधों और विरासत को बढ़ावा देना है। इस संदर्भ में, विदेश मंत्रालय ने 6-8 घंटे का एक लघु वेबिनार के लिए एक अस्थायी प्रस्ताव भेजने और उपयुक्त विषय पर 2-4 घंटे अतिरिक्त ऑफ़लाइन शोध के लिए जीबीयू से संपर्क किया था। इस कोर्स को आम तौर पर सरकारी कर्मचारियों और संबंधित कर्मियों और शिक्षाविदों को ध्यान में रख कर लक्षित किया गया है।यह प्रस्ताव विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के परामर्श से स्कूल ऑफ बौद्ध अध्ययन और सभ्यता के डॉ. अरविंद कुमार सिंह के द्वारा आईटीईसी के दिशा निर्देश को देखते हुए तैयार किया गया, जिसे विदेश मंत्रालय ने सक्षम स्तर के अधिकारी द्वारा अनुमोदित किया गया है।
पाठ्यक्रम को डिजाइन करने के लिए, जीबीयू ने इसे एक ऑनलाइन वेबिनार के साथ शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिसकी मुख्य बिंदु बौध अध्ययन एवं बौद्ध धर्म के सामाजिक आयामों की चर्चा है। यह वेबिनार 4-6 मार्च, 2021 को आयोजित की जाएगी जिसका थीम है एंगेज्ड बूद्धिसम: अ जोईंट वे फ़ॉर्वर्ड फ़ॉर इंडिया एंड अशियान भारत, और प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद पाठ्यक्रम मॉड्यूल की पूरी संरचना होगी तैयार किया। पाठ्यक्रम आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-2022 से पेश किया जाएगा।
यह उल्लेख करना आवश्यक है कि कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने सभी दस्तावेजों को देखा है और इसे उचित आकार देने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी भी दी है। प्रो. एन. पी. मेलकानिया, डीन, ऐकडेमिक ने न केवल न्यूनतम विवरणों का ध्यान रखा, बल्कि समय समय पर पूरा करने और प्रस्ताव को प्रस्तुत करने में भी प्रमुख भूमिका निभाई है।
जीबीयू और एमईए के बीच हाथ मिलाना एक बहुत बड़ी बात है और विशेष रूप से जीबीयू के लिए शिक्षा के क्षेत्र में और विशेष रूप से बौद्ध अध्ययन स्कूल के लिए में बड़ी उपलब्धियों में से एक है। बौध अध्ययन संकाय सदस्य यह जानकर बहुत खुश हैं कि कार्यक्रम स्वीकृत है और आगामी शैक्षणिक सत्र से इसकी पेशकश की जाएगी। यह जीबीयू के कई उपलब्धियों में से हाल के वक़्त में एक बड़ी उपलब्धि है।

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