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क्रिसमस मानव प्रेम का संदेश लेकर आता है-फादर ऑल्विन पिंटो

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ग्रेटर नोएडा। क्रिसमस पर्व को खीस्त जयंती या बड़ा दिन भी कहते हैं। यह पर्व दुनिया के कोने-कोने में धूमधाम से मनाया जाता है। जब-जब इस दुनिया में पाप बढ़ता गया, ईश्वर तब-तब खुद अवतार लेकर मनुष्यों के बीच रहने आते हैं। ईश्वर ने इस संसार को इतना प्यार किया कि उसने खुद मानव का देह धारण करने का निर्णय लिया। सदियों पहले प्रभु ईसा के जन्म की भविष्यवाणी की गयी थी। उसका नाम इम्मानुएल रखा गया जिसका अर्थ है कि ईश्वर हमारे साथ है। ईश प्रेम ने उसे संसार के उद्धार के लिए येसु के व्यक्तित्व में मानव रूप धारण करके पृथ्वी पर अवतरित होने को प्रेरित किया। आज मानवता अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इसका मूल करण मनुष्य खुद है। जिस मनुष्य के हाथ इस सुन्दर पृथ्वी को सौंपा था, उसी को मनुष्य ने अपने पाप के कारण दूषित किया है। मनुष्य इसी के चलते बहुत परेशान है वह प्रेम और शान्ति का भूखा है। क्रिसमस पर्व हमे इस तथ्य का स्मरण कराता है कि ईश्वर का प्रेम एवं मुक्ति सभी के लिए है। विशेषकर जो उनमें विश्वास करते है। येसु के जन्म का संदेश सर्वप्रथम गरीब चरवाहों को सुनाया गया जो यहूदी समाज में पिछड़े वर्ग में थे अर्थात ईश्वर की नजरों में सब लोग समान रूप से महत्वपूर्ण है और उसका मुक्ति कार्य सभी के लिए निर्धारित है, विशेषकर गरीबों और पापियों के लिए। ईश्वर ने इस दुनिया में मानव रूप लेने के लिए नाजरत के साधारण परिवार में यूसेफ और मरियम को चुना। बेतलेएम में एक चरणी में प्रभु जन्म लेते हैं। आज क्रिसमस हर धर्म के लोग बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। एक दूसरे को इस पर्व की बधाई देना केक और पकवान एक दूसरे के साथ बाँट कर खाना इस पर्व की विशेषता मानी जाती है। हर गिरजाघर की सजावट की जाती है और एक चरणी, हर ईसाई अपने घर के सामने सजाकर रख देता है। क्रिसमस को मनाने के लिए दिसम्बर की 24 तारीख को मध्य रात्रि पूजा-पाठ किया जाता है जिसमें प्रभु ईसा का जन्मोत्सव स्मरण किया जाता है। आज जब मनुष्य ईर्ष्या, दुश्मनी, आतंकवाद, हत्या, घमंड और अनेक बुराइयों का शिकार हो चुका है, ऐसे विपरीत समय में यह पर्व संदेश लेकर आता है कि आज हमें अनुकम्पा, सहानुभूति, विनम्रता, कोमलता और सहनशीलता धारण करने की सतत् आवश्यकता है और हमें प्यार से जीना है तभी हम एकता के सूत्र में बँधकर शान्ति के मार्ग पर चल सकेंगे। आइये हम सब मिलकर शन्ति दूत बनें। अन्धकार से प्रकाश की ओर अपना कदम रखें। इस दुनिया को एक सुन्दर जगह बनाएँ जहाँ सभी प्रेमभाव से जीवन व्यतीत कर सकें।

फादर ऑल्विन पिंटो

प्रधानाचार्य, सेंट जोसफ स्कूल, ग्रेटर नोएडा

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