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जीबीयू को भारत सरकार की DASA-2022 योजना के तहत 125 सीटें शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए हुआ जारी

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ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रकोष्ठ ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के आगामी डासा-2022 विदेशी छात्त्रों का सीधा नामांकन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आवेदन किया था। दरअसल डासा (डीएएसए), भारत के तकनीकी संस्थानों में विदेशी नागरिकों, एनआरआई (अनिवासी भारतीय), पीआईओ (भारतीय मूल के व्यक्ति) और भारत के विदेशी नागरिक (ओसीआई) के प्रवेश के लिए भारत सरकार (जीओआई) जिसमें आईआईटी, एनआईटी, प्रतिष्ठित संस्थान आदि शामिल हैं। इस प्रक्रिया के तहत विदेशी छात्र जो भारत में तकनीकी शिक्षा के इच्छुक हैं इन्हें भारत की बड़ी तकनीकी संस्थानों में अध्ययन का मौक़ा देती है। कुलपति प्रो. आर.के. सिन्हा ने कहा कि इस में शामिल होने से जीबीयू भी देश के नामी तकनीकी संस्थानों के समकक्ष आ खड़ी हुई है, क्योंकि इस कार्यक्रम में आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी, डीटीयू, इत्यादि ही इससे पहले प्रतिभाग किया करते थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन को आगामी सत्र के लिए डासा के तहत होनेवाली प्रवेश प्रक्रिया के लिए स्नातक स्तर की तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए 125 सीटें इस वर्ष की डासा की प्रवेश प्रक्रिया की समन्वयक संस्थान राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, वरंगल के अधिकारी द्वारा जारी किया गया है। विगत वर्षों में विश्वविद्यालय के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे ना केवल विदेशी छात्रों का विश्वविद्यालय के तकनीकी पाठ्यक्रमों में रुझान बढ़ेगा बल्कि साथ ही साथ अच्छी वित्तीय लाभ भी होगा। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रकोष्ठ और साथ ही कुलपति प्रोफेसर आर के सिन्हा के कुशल मार्गदर्शन में हासिल किया गया है। यह विश्वविद्यालय द्वारा हासिल किया गया एक बड़ा मील का पत्थर है जो जीबीयू को और अधिक एनआरआई, ओसीआई, सीआईडब्ल्यूजी और विदेशी छात्रों को विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने को आकर्षित करेगी।

इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय प्रशासन बहुत उत्साहित है और विदेशी छात्रों की संख्या एक लम्बी छलांग लगाने के लिए आतुर हैं और साथ ही सम्भावित तैयारियाँ भी करने में जुट गए हैं। इस शैक्षणिक सत्र के लिए अब तक, अधिकांश विदेशी छात्र मुख्य रूप से बौद्ध अध्ययन और सभ्यता स्कूल द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में जीबीयू का विकल्प चुनते हैं। मुख्य रूप से वियतनाम, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, मंगोलिया, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, यमन, आदि से विदेशी देशों से प्रमुख प्रवेश की सूचना मिली। उनमें से अधिकांश आईसीसीआर छात्रवृत्ति के माध्यम से हैं और अन्य सीधे प्रवेश से हैं। अब तक एमए-18, एमफिल-8, बीए-5, पीएचडी-10 सभी बौद्ध अध्ययन में, अन्य बीसीए, बीटेक, एमबीए, एमए, पीएचडी प्रबंधन, एमयूआरपी, आदि में हैं। 50 से अधिक पहले ही रिपोर्ट कर चुके हैं और विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले चुके हैं और इस महीने के अंत तक इतनी ही संख्या में छात्रों के आने की उम्मीद है।

 

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