नई दिल्ली(एजेन्सी)।ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने नया इतिहास रच दिया है. ओलंपकि खेलों में भारत को ट्रैक एंड फील्ड में पहली बार कोई पदक अपने नाम किया है और भारत ने गोल्ड मेडल से अपना खाता खोला है. ओलंपिक खेलों में व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाले वह दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने हैं. निशानेबाज अभिनव बिंद्रा के बाद नीरज चोपड़ा ने अपना नाम यहां दर्ज किया है. अभिनव बिंद्रा ने साल 2008 बीजिंग ओलंपिक में पहली बार व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड अपने नाम किया था।
नीरज चोपड़ा सेना में अधिकारी हैं और उन्होंने पहली बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया, वे किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष के बल पर टोक्यो में भारत का तिरंगा सबसे ऊंचा किया।
देश में क्रिकेटरों के अलावा अन्य खिलाड़ियों को उतनी पहचान नहीं मिलती जितनी मिलनी चाहिये लेकिन नीरज चोपड़ा केवल 23 साल की आयु में इतिहास रचकर सभी युवाओं के लिये प्रेरणा बन गये। 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के खांद्रा गांव में नीरज चोपड़ा का जन्म हुआ था. नीरज चोपड़ा गरीब किसान परिवार से आते हैं. 11 साल की उम्र में ही नीरज मोटापे का शिकार हो गए थे. उनका बढ़ता वजन देख घरवालों ने मोटापे को कम करने के लिए नीरज को खेल-कूद का सहारा लेने की सलाह दी। जिसके बाद वो वजन कम करने के लिए पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में जाने लगे. एक आम भारतीय लड़के की तरह उनकी भी पहली पसंद क्रिकेट ही था. लेकिन, स्टेडियम में जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ियों को देखकर उनके मन में आया कि मैं इसे और दूर तक फेंक सकता हूं।
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