ग्रेटर नोएडा। देश के पहले टेबल पंचांग का विमोचन प्रेरणा मीडिया नैपुण्य संस्थान, सेक्टर- 62 नोएडा में किया गया, जिसके निर्माणकर्ता श्याम सुन्दर पाठक हैं। पंचांग का विमोचन वरिष्ठ पत्रकार प्रत्यूष रंजन, आज तक के वरिष्ठ एकर सईद अंसारी व वरिष्ठ आई.पी. एस अधिकारी राजीव नारायण मिश्रा, एडिशनल पुलिस कमिश्नर नोएडा ने किया। मुख्य वक्ता प्रत्यूष रंजन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में जब तकनीक इतने आगे निकल चुकी है, आज से हजारों वर्ष पूर्व ही भारतीय मनीषियों ने एकदम सटीक व सर्वकल्याणकारी लाक गणना के साथ साथ पंचांग व ज्योतिष की खोज की, जो कि पूर्णतः वैज्ञानिक व गणितीय गणनाओं पर आधारित है। जिस सूर्यग्रहण व चन्द्रग्रहण को आज के वैज्ञानिक बड़ी बड़ी दूरबीनों के माध्यम से गणना करके बताते हैं, उसी को एक छोटे से कमरे में बैठ कर भारतीय मनीषी एकदम सटीक बता देते थे, जिसमें एक सेकण्ड की भी गलती नहीं होती थी। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आज के इस तकनीक के युग में हमको विभिन्न स्रोतों से प्राप्त हो रही जानकारियाँ, सूचनाओं, खबरों को भी फैक्ट पैक करके ही मानना व स्वीकार करना चाहिए। फिर चाहे वह ज्योतिष ही क्यों न हो। किसी भी बात को बिना फैक्ट चैक किए आंख बन्द करके मत यकीन कर लीजिए।
मुख्य अतिथि आज तक के वरिष्ठ पत्रकार सईद अंसारी ने अपने पिता का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें बचपन से ही पिता के दिए संस्कारों में देश की गंगा जमुनी तहजीब व काल गणना के प्रति सम्मान ने आज विचार शक्ति का इतना विस्तृत फलक प्रदान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज आवश्यकता है कि भारत की महानतम संस्कृति की आधारभूत विशेषताओं वसुधैव कुटुम्बकम व सर्वे भवन्तु सुखिनः को पुनः आत्मसात करते हुए पुनः भारत ती विश्व का मार्गदर्शक व विश्वगुरु बनाना है। उन्होंने आग्रह के साथ कहा कि हमे अपनी जड़ों से जुड़ना है। और वह अपनी परम्पराओं के पालन से ही सम्भव है।
वरिष्ठ आई पी. एस अधिकारी राजीव नारायण मिश्रा ने आज की पीढ़ी को जागृत और चेताते हुए कहा कि आज की पौड़ी अपनी संस्कृति, तीज त्यौहारों के महत्व व उसके वैज्ञानिक, सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व से कोसों दूर हो गए हैं। उन्होंने पंचांग निर्माणकर्ता श्याम सुन्दर पाठक की प्रशंसा करते हुए कहा कि अपने व्यस्ततम राजकीय कार्य दायित्वों की निभाते हुए भी अपनी संस्कृति के लिए किए जा रहे प्रयास प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकरणीय श्री है। उन्होंने इस दिव्य ज्योति पंचांग की भूरि- भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि हमे पंचांग के महत्व को समझना है और इस पंचांग के द्वारा कोई भी आसानी से भारतीय कालगणना व उसकी वैज्ञानिकता व महत्व को समझ सकेगा। दिव्य ज्योति पंचांग के निर्माणकली श्याम सुन्दर पाठक ने इस पंचाग के निर्माण के पीछे के उद्देस्य को प्रकट करते हुए कहा कि अपने ज्योतिष जान को अर्जित करने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि में प्रचलित पंचान है वे ज्योतिष व पंचाग विशेष के लिए समझना इसे आसान हो लेकिन आम व्यक्ति के लिए उसे समझना बहुत कठिन था. जबकि पंचाग लोक व्यक्ति के लिए हर दिन उपयोग में लाना जीवन में सफलता सुनिश्चित बयान है।
यह पंचाग आम जनमानस के लिए उन्हीं की सरशाषा में और हर पहलू पर तार्किक प्रकाश डालते हुए बनाया गया है। इसकी हर शान बढी लोकप्रियता इसकी उपयोगिता को इंगित करती है। अपनी दैनन्दिन जीवन में हमें आरतीय जना का उपयोग करना है। अपने जन्मदिन विवाह वर्षगाठव अन्य शुभ कार्य हिन्दू तिति के आधार पर करना है. तभी हम इसका यिनको समझ सथान भौरव अजित सभी ने किया। कार्यक्रम में राजपुरोहित मधुर, आरती शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता अतुल शर्मा, पूजा चौधरी, छवि श्रीवास्तव समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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