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ट्यूशनः छात्रों के लिए एक जरूरी बैसाखी – जया घोष

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एक वक्त था जब मां की शिक्षा को ही सब कुछ मान लिया जाता था, मगर कुछ और ज्ञान अर्जन करने के लिए गुरु की आवश्यकता होती थी। तभी तो ऊंचे कुल के बच्चों को गुरूकुल भेजा जाता था, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए। मगर जैसे-जैसे युग बदलता गया वैसे ही यह गुरु शिष्य प्रथा भी बदल गया। गुरूकुल स्कूल में और स्कूल की पढ़ाई को पूर्ण करने के लिए ट्यूशन की आवश्यकता होने लगी। आजकल की भारतीय शिक्षा प्रणाली के अनुसार अच्छी नौकरी के लिए परीक्षा में ज्यादा से ज्यादा अंक लाना जरूरी है, जिसके चलते हर अभिवावक को अपने बच्चे की भविष्य की चिंता रहती है। अच्छे से अच्छे निजी स्कूल में पढ़ने के बाद भी बच्चों में ट्यूशन व कोचिंग करने का चलन बढ़ता ही जा रहा है। ट्यूशन टीचर बच्चों को स्कूल के होमवर्क के साथ साथ नोट्स भी प्रदान करते हैं। इस तरह बच्चों को बहुत मदद मिल जाती है। हर माँ-बाप अपने बच्चे को डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहता है, स्कूल की कक्षाओं में कम से कम 35 से 40 छात्र होते हैं, ऐसे में सिर्फ वहां की पढ़ाई के भरोसे अच्छे नंबर लाना संभव नहीं है। इसके लिए बच्चों को ट्यूशन भेजना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

हालाँकि यह बहुत अच्छा है अगर माता-पिता भी अपने बच्चों की पढ़ाई में सक्रिय रूप से शामिल हो सकें लेकिन कई निजी कारणों से यह हर बार संभव नहीं हो पाता। एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्यूशन का चलन शहरी परिवारों के विकसित घरों में ज्यादा है। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं और उनकी पढ़ाई अधिक कठिन होती जाती है, माता-पिता हमेशा उपयुक्त सहायता प्रदान करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। ऐसे मामलों में, एक ट्यूटर होना जिसके पास समय और आवश्यक कौशल दोनों हों, एक बड़ी मदद हो सकती है, जिससे छात्रों और अभिभावकों दोनों को लाभ हो सकता है। ट्यूशन न केवल छात्रों के ऐकडेमिक मार्क्स को सुधारने में विशेष रूप से प्रभावी है, बल्कि गणित और विज्ञान जैसे विषयों में उनकी समझ को भी बेहतर बनाते है।

ट्यूशन कि लोकप्रियता आप ऐसे समझ सकते है की आज हर घर में एक ट्यूटर है” आल सब्जेक्ट्स का ज्ञान अपने अंदर समेटे हुए। सच कहूँ तो मेरे लिए यह एक आश्चर्य की बात है, मेरे लिए विषय की गुणवत्ता ज्यादा जरूरी है। खैर कुछ कमियां तो हर इंडस्ट्री में होती हैं। जरुरत है अपने बच्चों के लिए एक ऐसा ट्यूटर सुनिश्चित करना जो आपके बच्चे के लिए उपयुक्त हो। सही ट्यूटर जो अपने विषय में पारंगत हो और छात्रों को भी प्रेरित कर सके।

-जया घोष (मैथ्स बुक ऑथर, मैथ्स एडुकेटर)

 

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