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काँचबिंदु (काला मोतिया) से बचने के लिए नियमित करातें रहें आखों की जांच

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डॉक्टर नन्दिता चतुर्वेदी
नेत्र रोग विशेषज्ञ, राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान ग्रेटर नोएडा

ग्रेटर नोएडा,14 जनवरी। दृष्टि प्रकृति के अमूल्य वरदानों में से एक है। हमारी दृष्टि पर मंडराते हुए तनिक से भी संकट से हम अत्यधिक विचलित हो उठते हैं। परंतु कुछ रोग ऐसे भी हैं जो चोरी छुपे हमारी नेत्र ज्योति का हरण कर लेते हैं और हमको आभास तक नहीं हो पाता। ऐसा ही एक “दृष्टि का गुप्त चोर” है काँचबिंदु जिसे आम भाषा में काला मोतिया बोलते हैं। काले मोतिया में आँख के पीछे स्थित तंत्रिका “ऑप्टिक नर्व” क्षतिग्रस्त हो जाती है। यह तंत्रिका आंख से मस्तिष्क तक दृश्य संकेतों का वहन करती है। यह मस्तिष्क को “देखने” के लिए सक्षम बनाता है। आँख एक तरल पदार्थ से भरी खोखली गेंद की भाँति होती है। यह तरल पदार्थ “ऐक्वीयस ह्यूमर” कहलाता है और आँख में एक निर्धारित दबाव बनाए रखता है। जब इस तरल पदार्थ का आँख से निकास बाधित हो जाता है तो आँख के अंदर का दबाव बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ दबाव नेत्र तंत्रिका को आघात पहुँचा कर काले मोतिया की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। मानवीय आँख सामने देखने के साथ साथ कुछ हद तक परिधि को भी देख सकती हैं। जैसे जैसे तंत्रिका पर काले मोतिया का प्रभाव बढ़ता जाता है नेत्रों की परिधि में देखने की क्षमता कम होती जाती है। इस अवस्था में अमूमन रोगी बीमारी से अनभिज्ञ होता है और प्रायः नियमित नेत्र जाँच के दौरान इसका पता चलता है।
जब तक इस रोग के लक्षण प्रत्यक्ष रूप से स्पष्ट होते हैं तब तक रोग काफ़ी प्रगति कर चुका होता है। तंत्रिका पर काले मोतिया से होने वाले दुष्प्रभावों को उपचार से भी मिटाया नहीं जा सकता। अतः यह अत्यावश्यक है कि जन साधारण अवगत रहे कि किसको रोग होने की संभावना अधिक है व इसके प्रारम्भिक संकेत क्या हैं। आइए, अब हम रोकथाम और उपचार के विषय में कुछ मुख्य बिंदुओं पर एक दृष्टि डालते हैं।
1)अगर आपके निकटीय परिवारजनों में काला मोतीया या अंधेपन का इतिहास है, तो सतर्क रहें और सालाना नेत्र परीक्षण को एक नियमित अभ्यास बनाएं।
2)कुछ व्यक्तियों को आँखों में भारीपन, दर्द, रात में कम दिखना, चश्मे के नम्बर का बार बार बदलने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
3)थोड़ी और गंभीर अवस्था में रोगी को वस्तुओं में टकराने या वाहन चलाने में परेशानी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
4)एक विशेष प्रकार के काले मोतिये में रोगी को बहुत असहनीय दर्द, लालिमा, निग़ाह में गिरावट और उल्टी हो सकती है। यह एक आपातकालीन समस्या है।
5)अगर आप को इन में से कोई लक्षण महसूस हों तो शीघ्रातिशीघ्र नेत्र रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क करें।
6)बग़ैर नेत्र चिकित्सक की सलाह के आँखों में कोई दवाई न डालें। कुछ दवाएँ आँख का दबाव बढ़ा सकती हैं।
7)यदि आपको चिकित्सक द्वारा बताया जाए कि आपको काला मोतिया है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है परंतु यह अवश्य सुनिश्चित करें कि आप निर्देशानुसार दवा एवं नियमित जाँच का पूर्ण रूप से पालन करें।

समयोचित निदान एवं उपचार से काले मोतिया को बूँद की दवाओं के माध्यम से बखूबी नियंत्रित किया जा सकता है। जिन रोगियों को दवाई से वांछित नियंत्रण नहीं मिल पाता उनके लिए अत्यंत प्रभावशाली व सुरक्षित शल्य चिकित्सा का विकल्प भी उपलब्ध है। हमारे संस्थान में भी काले मोतीये के निदान एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
जागरूकता के साथ ही हम सब मिल कर इस चुनौती को परास्त कर सकते हैं। आवश्यकता भय की नहीं बल्कि सुदृढ़ कार्यवाही की है। सभी के लिए दृष्टि के अधिकार की सुरक्षा हम सब का कर्तव्य है, याद रखें जागरूकता में ही सुरक्षा है।

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