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जीबीयू में तीन दिवसयी अन्तराष्ट्रीय मेगा वेबिनार का आगाज, वैश्विक कल्याण एवं प्राचीन परम्परा पर हुई चर्चा

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ग्रेटर नोएडा,9 जुलाई। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय का बौध अध्ययन एण्ड सभ्यता संकाय एक तीन दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय वेबिनार का आग़ाज़ हुआ। इस वेबिनार का मुख्य विषय ग्लोबल वैल बिंग एण्ड द टीनेत्स ऑफ़ एन्सीएंट इंडियन ट्रेडिसन्स विद रेफरेंस टू बुद्धिज्म (वैश्विक कल्यान एवं प्राचीन भारतीय परम्परा के सिद्धांतों का बौध-धर्म के संदर्भ में) मुख्य विषय के साथ साथ इसमें दस अन्य सहायक विषय वस्तु भी है। वेबिनार के उद्घाटन सत्र में भारतीय परम्परा और बौध परम्परा के जाने माने देश और विदेश से विद्वानों ने ऑनलाइन भाग लिया और अपने उद्बोधन को प्रतिभागियों से साझा किया। अध्यक्षीय अभिभाषण में  जीबीयू के कुलपति भगवती प्रकाश शर्मा ने वेबिनार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और यह आशा जतायी कि अगले तीन इस विषय पर चर्चा ही नहीं होगी। बल्कि वेबिनार के बाद वेबिनार में हुई चर्चा को रेकोर्ड कर ग्रंथ के रूप में प्रकाशित भी किया जाएगा। प्रो. केटीएस सराओ इस कार्यक्रम के किनोट वक्ता थे। उन्होंने बौध अन्य भारतीय परम्परा और  मानव कल्याण को ध्यान में रखते हुए अपनी बात रखी। नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. बैद्यनाथ लाभ जो इस उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि भी थे उन्होंने अपने व्यक्तव्य में इस कार्यक्रम की पुरज़ूर तारीफ़ की और कहा कि भारतीय परम्परा जिसमें बौध परम्परा भी शामिल सिर्फ़ वही आज की चुनौती भारी वक़्त में इससे निकलने का रास्ता दिखा सकती है।

दूसरे मुख्य अतिथि जो कि वीयतनाम बुद्धिस्ट विश्वविद्यालय के वाइस रेक़्टोर प्रो. थिच नहत टू ने अपने उद्घोषण के द्वारा यह बताया कैसे वीयतनाम ने बौध सिद्धांतों का पालन करते हुए। इस महामारी लगभग अब तक अछूता है या कहें कि इसका ज़्यादा असर नहीं है। वहीं श्रीलंका के प्रो. अभयतिस्सा ने बताया कि किस तरह भारतीय बौध परम्परा ने श्रीलंका के सांस्कृतिक उत्थान में अहम् भूमिका भूत में भी निभायी है और आज भी हम इस कोविड से लड़ने में सहायक सिद्ध हो रहा है। आईबीसी के सचिव डॉ. धम्मपिय ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि कैसे बौध परम्परा का पालन करते हुए। कैसे लोग अपनी जीवन में आइ परेशानियों से कैसे निजात पा सकते हैं। प्रो. एस.के. सिंह ने स्वागत व्याख्यान दिया। इस वेबिनार के आयोजक सचिव डॉ. अरविन्द कुमार सिंह ने बताया कि इस वेबिनार आयोजन में तीन देशों के संस्थान भी सहयोगी की भुमिका में शामिल हैं। विदेशी सहयोगी संस्थानों के नाम हैं विएतनाम से विएतनाम बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी, हनोई, म्यान्मार से धम्मदूट चेकिंडा यूनिवर्सिटी, यंगुन एवं श्रीलंका से स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, कोलोंबो। वियतनाम मुख्य अतिथि जिनकी एक संस्था है बुद्धिज्म टुडे फ़ाउंडेशन है उन्होंने इस वेबिनार में प्रस्तुत की गयी सभी शोध पत्रों को प्रकाशित करने का निर्णय लिया है और इस बात की घोषणा आज उद्घाटन सत्र में किया गया है।

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