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पेट का दर्द हो सकता है हर्निया का संकेत- जागरूकता के लिए यथार्थ हॉस्पिटल, ग्रेनो ने शुरू की विशेष हर्निया क्लिनिक

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ग्रेटर नोएडा। पेट की सेहत को अक्सर हल्के में ले लेते हैं। जब तक परेशानी साफ दिखाई न दे, तब तक हम उसे बीमारी मानने को तैयार ही नहीं होते हैं। कई बार लापरवाही की वजह से लोग जान भी नहीं पाते हैं। ऐसे में हर्निया को लेकर जागरूकता बहुत जरूरी है, क्योंकि ज़्यादातर लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। पेट में होने वाले दर्द या उभार को नॉर्मल समझकर टाल दिया जाता है, जबकि यही छोटी लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है। इसी उद्देश्य से यथार्थ हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा ने शुक्रवार को अपने परिसर में विशेष हर्निया क्लिनिक की शुरुआत की है। डॉ. मोहिब हमीदी, सीनियर कंसल्टेंट एवं विभागाध्यक्ष (HOD)  रोबोटिक सर्जन– जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा ने बताया कि हर महीने औसतन 30 से 40 मरीज हर्निया की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। हर्निया की परेशानी ज्यादातर 50 से 80 वर्ष की उम्र के लोगों में होती है, लेकिन यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि 20 से 40 वर्ष की उम्र के युवाओं में भी आम होती जा रही है।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ (NIH) के अनुसार, इनगुइनल हर्निया पुरुषों में काफ़ी अधिक पाया जाता है। पुरुषों में जीवन भर इनगुइनल हर्निया होने का जोखिम लगभग 27%–42% रहता है, जबकि महिलाओं में यह केवल 3%–6% होता है। सभी इनगुइनल हर्निया सर्जरी में लगभग 90% मरीज पुरुष होते हैं। इसके विपरीत, हालांकि फीमोरल हर्निया अपेक्षाकृत दुर्लभ है, लेकिन यह महिलाओं में अधिक देखा जाता है। कुल मिलाकर, पेट से जुड़े हर्निया सहित सभी प्रकार के हर्निया मामलों में पुरुषों की हिस्सेदारी अधिक रहती है, और अध्ययनों के अनुसार लगभग 86% केस पुरुषों के होते हैं।

हर्निया से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष

  • इनगुइनल हर्निया (ग्रोइन): महिलाओं की तुलना में पुरुषों में इनगुइनल हर्निया की सर्जरी की संभावना लगभग 9–10 गुना अधिक होती है
  • फीमोरल हर्निया: इनगुइनल हर्निया की तुलना में कम आम होने के बावजूद, यह महिलाओं में अधिक पाया जाता है, जिसका एक प्रमुख कारण उनका अपेक्षाकृत चौड़ा पेल्विस माना जाता है
  • अम्बिलिकल और इंसिज़नल हर्निया: ये हर्निया महिलाओं में अधिक देखे जाते हैं, खासकर प्रेग्नेंसी और पेट की पूर्व सर्जरी से जुड़े जोखिमों के कारण
  • ओवरऑल ट्रेंड्स: जहाँ पुरुषों में इनगुइनल, फीमोरल और एब्डॉमिनल हर्निया की दर अब भी अधिक है (2019 में लगभग 86% मामले), वहीं महिलाओं में भी हर्निया विकसित होने की दर धीरे-धीरे बढ़ रही है
  • एज फैक्टर: पुरुषों में इनगुइनल हर्निया के मामले दो आयु वर्गों में अधिक देखे जाते हैं—जीवन के पहले वर्ष में और फिर 40 वर्ष की उम्र के बाद

उन्होंने कहा कि हर्निया के होने के कारणों में लाइफ स्टाइल की भी बड़ी भूमिका होती है। लगातार रहने वाली खांसी, लंबे समय से बनी कब्ज और भारी वजन उठाना हर्निया के मुख्य कारण हैं। जो लोग जिम में अधिक एक्सरसाइज करते हैं या जिनकी पेट की सर्जरी पहले कभी हो चुकी है, उनमें भी हर्निया का खतरा बढ़ जाता है। पुरुषों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है, लेकिन महिलाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। हर्निया के शुरुआती लक्षणों में पेट के किसी हिस्से में दर्द, खासकर उस जगह पर जहां पहले सर्जरी हुई हो। खांसने और वजन उठाने पर पेट में उभार दिखाई देना शामिल है। कई मरीज चलते समय या सीढ़ियां चढ़ते हुए भी उभार महसूस करते हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हर्निया का स्थायी इलाज केवल सर्जरी है। हर्निया दरअसल पेट की दीवार में एक कमजोरी या छेद होता है। अगर इसका इलाज समय पर नहीं कराया गया तो आंत का हिस्सा उस छेद से बाहर आकर फंस सकता है। ऐसी स्थिति में इमरजेंसी सर्जरी करनी पड़ती है, जो जोखिम भरी हो सकती है। इसलिए देरी करना ठीक नहीं है।” पहले हर्निया का इलाज ओपेन सर्जरी से किया जाता था, जिसमें दर्द ज्यादा होता था, अस्पताल में ज्यादा दिन रुकना पड़ता था और बड़ा निशान रह जाता था। अब लैप्रोस्कोपी तकनीक के जरिए सर्जरी की जा रही है, जिसमें दर्द कम होता है, अस्पताल में रहने का समय घट जाता है और निशान भी बहुत छोटा रहता है। मरीज एक या दो दिन में घर जा सकता है और तीन से चार दिन में सामान्य काम पर लौट सकता है। हर्निया से बचाव संभव है, यदि लोग अपनी सेहत के प्रति सजग रहें। किसी को पुरानी खांसी या कब्ज है तो उसका समय पर इलाज कराएं। भारी वजन उठाने से बचें और हर काम संतुलन में करें। छोटी-छोटी सावधानियां आपको सर्जरी से बचा सकती है।

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