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80-वर्षीय मरीज की हाइ-रिस्क टीएवीआर प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न, मरीज दुर्लभ एओर्टिक कैल्सिफिकेशन से थे ग्रस्त

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ग्रेटर नोएडा। फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में डॉक्टरों की टीम ने, गंभीर और जीवनघाती हार्ट वाल्व कंडीशन से जूझ रहे 80-वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया है। मरीज के एओर्टिक वाल्व और प्रमुख रक्तधमनियों में कैल्शियम का काफी जमाव था जिसके परिणामस्वरूप उनकी धमनियां काफी सख्त हो गई थीं और हृदय को होने वाला रक्तप्रवाह काफी प्रभावित था। इसकी वजह से उनकी स्थिति काफी बिगड़ रही थी और वे कभी भी हृदयाघात का शिकार बन सकते थे। लेकिन इन तमाम जटिलताओं के बावजूद, मेडिकल टीम ने उनकी मिनीमॅली इन्वेसिव ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर) प्रक्रिया की जिसमें रोगग्रस्त एओर्टिक वाल्व को बिना ओपन हार्ट सर्जरी किए बदला गया। यह मामला ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में शुरुआत में संपन्न अत्यंत जटिल टीएवीआर प्रक्रियाओं में से है, और इसे अत्याधुनिक वाल्व टेक्नोलॉजी की मदद से अंजाम दिया गया, जिसने इसे उक्त हाइ-रिस्क बुजुर्ग मरीज के मामले में अत्याधुनिक कार्डियाक केयर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित किया है।
उक्त बुजुर्ग मरीज मधुमेह, हाइपरटेंशन, थायरॉयड विकार, और सीओपीडी जैसी कई क्रोनिक कंडीशन से भी जूझ रहे थे और हाल के हफ्तों में उनके सीने में दर्द अधिक रहने लगा था तथा उन्हें सांस लेने में तकलीफ भी बढ़ गई थी। उनकी सेहत इस हद तक बिगड़ चुकी थी कि उनके लिए मामूली चलना-फिरना भी कठिन होता जा रहा था, जिसकी वजह से उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होने लगी थीं।
शुरूआती डायग्नॉस्टिक जांच में ईसीजी, 2डी इकोकार्डियोग्राफी, और सीटी एओर्टाग्राम से पता चला कि उनका एओर्टिक वाल्व काफी संकुचित हो चुका है, यह ऐसी गंभीर कंडीशन थी जिसकी वजह से रक्तप्रवाह काफी सीमित हो गया था और मरीज तत्काल जीवनघाती जटिलताओं की चपेट में आ सकते थे। इस कंडीशन की वजह से, जिसे एओर्टिक स्टेनॉसिस कहा जाता है, हृदय से रक्त को सही ढंग से पंप करने की क्षमता काफी प्रभावित होती है।
मरीज की अधिक उम्र और जटिल मेडिकल हिस्ट्री की वजह से उनके मामले में पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी नहीं की जा सकती थाी क्योंकि इसमें काफी रिस्क था। लिहाजा, मेडिकल टीम ने ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर) का फैसला किया – यह मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया है जिसमें एक कैथेटर की मदद से नया वाल्व डाला जाता है और ऐसा करने के लिए किसी बड़ी सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। मरीज की इमेजिंग जांच से उनकी रक्तधमनियों तथा महाधमनी (एओर्टा) में काफी गंभीर मात्रा में कैल्सिफिकेशन का भी पता चला था, जिसने इस प्रक्रिया की जटिलता बढ़ा दी थी और उपचार करने वाली टीम के लिए खासतौर से यह मामला काफी चुनौतीपूर्ण था।
इस प्रक्रिया को डॉ शांतनु सिंघल, कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा तथा डॉ धीरज शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, सीवीटीएस सर्जरी, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा के नेतृत्व में पूरा किया गया। सावधानीपूर्वक की गई प्लानिंग और सटीक तरीके से की गई प्रक्रिया के परिणामस्वरूप, वाल्व को करीब एक घंटे में सफल तरीके से बदला गया, जिससे मरीज के रक्तप्रवाह में काफी सुधार हुआ। मरीज ने तेजी से रिकवरी की और प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी हालत स्थिर रही जिसे देखते हुए दो दिनों के बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई क्योंकि किसी तरह की बड़ी जटिलता पेश नहीं आयी थी और न ही स्थायी पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ी।
इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ शांतनु सिंघल, कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा, ने कहा, “मरीज की उम्र, कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं और कैल्सिफिकेशन के स्तर को देखते हुए यह काफी चुनौतीपूर्ण मामला था। उनकी कभी भी अचानक हृदयाघात से मृत्यु का खतरा था, और यही वजह है कि समय पर मेडिकल हस्तक्षेप करना और भी अहम् था। ऐसे में मिनीमॅली इन्वेसिव तकनीक ने हमें इस रिस्क को काफी हद तक कम करने में मदद की।”
सिद्धार्थ निगम, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, “यह उन्नत वाल्व टेक्नोलॉजी की मदद से ग्रेटर नोएडा में की गई शुरुआती जटिल टीएवीआर प्रक्रियाओं में से है। इस प्रकार के उन्नत समाधानों को मरीजों के नजदीक लाना स्पेश्यलाइज़्ड कार्डियाक केयर तक पहुंच में विस्तार करने और जटिल मामलों में परिणामों में सुधार लाने के हमारे प्रयासों को दर्शाता है।”

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