श्री यादव ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने बताया कि एनसीआर राज्यों और उनके संबंधित नगर निगमों की वार्षिक कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई है, जिनमें अकेले दिल्ली में 448 कार्य बिंदु शामिल हैं। धूल प्रदूषण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री यादव ने कहा कि धूल इस क्षेत्र में पीएम 10 प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि इस पहल के सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेष कार्य बल का गठन किया जाना चाहिए और यातायात जाम एवं धूल प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित सड़कों का वैज्ञानिक मानचित्रण किया जाना चाहिए। हरियाली के महत्व पर जोर देते हुए श्री यादव ने कहा कि खुले क्षेत्रों में कम पानी की आवश्यकता वाले पौधे लगाए जाने चाहिए, जिनकी लगभग 30 उपयुक्त प्रजातियों की पहचान पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पहले ही की जा चुकी है।
श्री यादव ने सड़कों से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक संरचनात्मक उपायों को आगे बढ़ाने में सीएक्यूएम, एनसीआर राज्य सरकारों, सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के समन्वित प्रयासों की सराहना की और समयबद्ध कार्यान्वयन तथा सशक्त डिजिटल निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया। सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए से अनुरोध किया गया कि वे अपनी सड़क डिजाइन योजनाओं में हरित घटकों को शामिल करें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एनसीआर में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों के तहत ऐसे कार्य किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी हरित दिशानिर्देशों को विकास योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
श्री यादव ने इस पहल को ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि इस प्रयास के माध्यम से नीति निर्माता, विशेषज्ञ और कार्यान्वयन एजेंसियां एकजुट हुई हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) कार्यकलापों में कण पदार्थ उत्सर्जन में योगदान देने वाले सभी हितधारकों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना मात्र एक प्रक्रियागत अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रतिबद्धता और मिशन है जिसका उद्देश्य ठोस सामाजिक प्रभाव के साथ जमीनी स्तर पर स्पष्ट परिवर्तन लाना है।
इससे पूर्व, 10.06.2025 को सीएक्यूएम ने मानक संरचना के कार्यान्वयन को सुगम बनाने और संस्थागत एवं तकनीकी निगरानी प्रदान करने के लिए एक परियोजना निगरानी प्रकोष्ठ (पीएमसी) की स्थापना हेतु सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। आज हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन, राज्य सड़क स्वामित्व एजेंसियों को सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के साथ औपचारिक रूप से एकीकृत करके इस ढांचे को विस्तारित और प्रचालित करते हैं।
इन समझौता ज्ञापनों का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित मॉड्यूल के माध्यम से सीएक्यूएम मानक ढांचे के अनुसार सड़क विकास कार्यों का व्यवस्थित कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करना है:
दायरा और कार्यान्वयन
समझौता ज्ञापनों के तहत:
इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित प्रमुख घटकों को लक्षित किया जाएगा :
ये समझौता ज्ञापन प्रारंभ में हस्ताक्षर की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए वैध रहेंगे और आपसी सहमति से इन्हें बढ़ाया जा सकता है। रोडमैप के अनुसार, प्रत्येक राज्य एक नोडल एजेंसी की पहचान करेगा और समन्वित कार्यान्वयन के लिए एक समर्पित पक्कीकरण एवं हरियाली प्रकोष्ठ स्थापित करेगा । सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए तकनीकी सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे और आरएएमएसएस के तहत डेटा एकीकरण, तकनीकी विश्लेषण, डिजाइन सत्यापन और रखरखाव रणनीतियों की तैयारी के लिए संस्थागत सहायता प्रदान करेंगे।
इस पहल के अंतर्गत एनसीआर राज्यों द्वारा सूचित की गई कुल सड़क लंबाई में दिल्ली में लगभग 10,099 किमी, हरियाणा में 10,133 किमी, उत्तर प्रदेश में 6,891 किमी और राजस्थान में 1,747 किमी शामिल हैं। कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिसके तहत तीन वर्षों की अवधि में लक्षित कार्य योजनाएं विकसित की जाएंगी। मानकीकृत सड़क विकास पद्धतियों और मानकीकृत सड़क विकास प्रक्रियाओं के सुव्यवस्थित कार्यान्वयन से निम्नलिखित लाभ होने की उम्मीद है:
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