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110 किग्रा भार वजन की 38 वर्षीय महिला ने मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की मदद से डायबिटीज और मोटापे को दी मात

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ग्रेटर नोएडा। भारत के शहरों में मोटापे और उससे जुड़े मेटाबोलिक डिसऑर्डर के बढ़ते मामलों के बीच सेक्टर-16 बी, ग्रेटर नोएडा वेस्ट (उत्तर प्रदेश) की 38 साल की महिला ज्योति ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सर्वोदय हॉस्पिटल में मिनिमली इनवेसिव बैरिएट्रिक (वज़न घटाने) सर्जरी करवाने के एक महीने के अंदर 20 किलोग्राम वज़न कम कर लिया है। उसके बाद से उनकी डायबिटीज़ की दवा मेडिकल देखरेख में बंद कर दी गई है। इस सुधार से मोटापे से जुड़ी बीमारियों को मैनेज करने में मेटाबोलिक सर्जरी की बढ़ती भूमिका का पता चलता है।

मरीज़, ज्योति का वज़न 110 किग्रा था और हॉस्पिटल में भर्ती होने के समय उनका बॉडी मास इंडेक्स  40 था। इतने सालों में ज़्यादा वज़न की वजह से उन्हें कई स्वास्थ्य समस्याएं हुईं। उन्हें पीसीओडी की वजह से सेकेंडरी इनफर्टिलिटी, स्लीप एपनिया, फैटी लीवर की बीमारी, अनियंत्रित डायबिटीज़, और दोनों कलाइयों में कार्पल टनल सिंड्रोम था। लंबे समय तक मोटापे और उससे जुड़े तनाव की वजह से उनकी पीठ पर एक दर्दनाक गांठ भी हो गई थी। इस वजह से उनका उसका चलना-फिरना और रोज़ाना के काम करना मुश्किल हो गया था। व्यापक चिकित्सीय और मेटाबोलिक जांच के बाद डॉक्टरों ने लंबे समय के इलाज के तौर पर बैरिएट्रिक मेटाबोलिक सर्जरी की सलाह दी। यह प्रक्रिया लैप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी, कीहोल तरीके का इस्तेमाल करके लैप्रोस्कोपिक तरीके से अंजाम दी गई।

फोटो-सर्जरी के बाद स्वास्थ्य में मिला लाभ, अब डायबिटीज से मिली मुक्ति

ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल के डॉ. पियूष अग्रवाल ने बताया कि मरीज़ के हाई बीएमआई  और मोटापे से जुड़ी कई कोमोरबिडिटी को देखते हुए मेडिकली सर्जरी की सलाह दी गई। यह प्रक्रिया मिनिमली इनवेसिव की होल अप्रोच का इस्तेमाल करके की गई। इस प्रक्रिया में कुछ छोटे चीरों से ऑपरेशन करना होता है और इसके लिए एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक स्किल्स की ज़रूरत होती है, खासकर उन मरीज़ों में जिन्हें बहुत ज़्यादा मोटापा और उससे जुड़ी मेटाबोलिक बीमारियां होती हैं। सर्जरी में पेट का आकार कम करना होता था, साथ ही जटिलताओं को कम करने के लिए सटीकता और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाती है। इस केस में तकनीकी समस्याओं के बावजूद मरीज़ तेज़ी से ठीक हुई। वह 4 घंटे के अंदर चलने लगी, अगले दिन लिक्विड डाइट शुरू कर दी, और अगले ही दिन उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज़ के नज़रिए से यह बदलाव बहुत राहत वाला रहा है।

मरीज़ ने बताया, “मुझे अपने ज्यादा वजन की वजह से कई सारी चीजों में दिक्कत होती थी। एक साधारण सी भी चीज़ करने में मुझे थकान महसूस होने लगती थी और मेरी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही थी। सर्जरी के बाद मैंने बहुत ही हल्का महसूस किया और ज्यादा सक्रिय रहने लगी। इससे मेरी डायबिटीज की दवाई बंद हो गई हैं। इस वजह से मेरे अंदर एक नया आत्मविश्वास और भविष्य के लिए नहीं उम्मीद जगी है।

बैरिएट्रिक सर्जरी का उपयोग गंभीर और लंबे समय से चले आ रहे मोटापे के इलाज के लिए ज्यादा से हो रहा है। जब लाइफस्टाइल में बदलाव और दवा से लगातार मोटापा कम नहीं होता है तो यह प्रक्रिया की जाती है। यह प्रक्रिया पाचन तंत्र को बदलकर खाना कम करता है, शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल असंतुलन पर अच्छा असर डालता है, और कुछ प्रक्रिया में कैलोरी अवशोषण को कम करता है। पेट की क्षमता कम करके और भूख बढ़ाने वाले हार्मोन को कम करके यह मरीज़ों को कम भूख लगने में मदद करता है, इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाता है, और लगातार वज़न घटाने में मदद करता है।

वजन कम करने के अलावा यह सर्जरी टाइप 2 डायबिटीज में भी काफी सुधार करती है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखती है, कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी कम रखती है और हृदय संबंधित बीमारियों से भी बचाती है। जोड़ों के दर्द में राहत देती है, चलने फिरने में सुधार करती है और नींद तथा सांस संबंधी समस्याओं में भी कमी लाती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने यह पाया है कि समय पर सावधानी पूर्वक सर्जरी कराने से मरीज को लॉन्ग टर्म बीमारियों से राहत मिल सकती है और उनकी संपूर्ण जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

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