नई दिल्ली। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में “माइक्रोग्रिड ऐन अपॉरचुनिटी: इलेक्ट्रिक व्हीकल्स एंड रिन्यूएबल एनर्जी रिसोर्सेज” विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। यह प्रोग्राम अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा प्रमाणित एवं प्रायोजित है। और ऑनलाइन मोड में किया जा रहा है। इसमें देश और विदेश के 17 तकनीकी संस्थानों और इंडस्ट्रीज के 18 विद्वान प्रोफेसर एवम अभियंता व्याख्यान दे रहे हैं। व्याख्यान देने वाले कुछ प्रोफेसर डायरेक्टर पद पर भी नियुक्त है। डॉक्टर राजीव कुमार चौहान 5-9 जुलाई 2021 तक होने वाले इस प्रोग्राम के समन्वयक और दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के विद्युत् अभियांत्रिकी विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। माइक्रोग्रिड में दस सालों से महत्वपूर्ण योगदान देकर देश एवम् विदेशों में दर्जनों सम्मान ग्रहण करने वाले डॉक्टर चौहान ने बताया कि यह प्रोग्राम फैकल्टीज को देश विदेश में माइक्रोग्रिड के क्षेत्र में हो रहे शोध से अवगत कराएगा। एवं माइक्रोग्रिड के क्षेत्र में शोध करने के लिए प्रेरित करेगा। आजकल देश एवं विदेश में प्रदुषण को कम करने के लिए हरित ऊर्जा स्रोतों एवं विद्युत वाहनों का चलन बढ़ता ही जा रहा है। डा. चौहान ने बताया कि मइक्रोग्रिड ने केवल हरित ऊर्जा स्रोतों एवं विद्युत वाहनों को वर्तमान विद्युत प्रणाली से जुड़ने में मदद करेगा। मइक्रोग्रिड ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भी विशेष रूप से विद्युत आपूर्ति में सहायक सिद्ध होगा एवं विद्युत उपभोगताओं के लिए व्यापार के नए अवसर भी प्रदान करेगा।
अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे बड़ी चिंता प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर बिजली उत्पादन करने की है। जिसके उत्पादन करने में अभी मनुष्य सामर्थ्यवान नहीं हैं। ऊर्जा में अनियंत्रित और अनिश्चितता के कारण अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में उत्पादन एकीकरण को और अधिक जटिल बना रहा है। इसके अलावा, अक्षय ऊर्जा संसाधनों (आर० ई० एस०) के साथ कई तकनीकी चुनौतियां हैं, जैसे बिजली की उपलब्धता, बिजली की गुणवत्ता के मुद्दे, संसाधन स्थान, सूचना बाधा और लागत के मुद्दे। इन सब के निवारण के लिए डा० रॉबर्ट हेब्नर (निदेशक, सेंटर फॉर एलेक्ट्रोमैकैनिक्स, टेक्सास विश्वविद्यालय, ऑस्टिन, यू ० एस० ए०) ने हरित ऊर्जा स्रोतों के साथ विधुत ऊर्जा भंडारण उपकरणों को जोड़ने पर बल दिया।
डा. बेहनम मोहम्मदी-इवातलू (प्रोफेसर, तबरीज़ विश्वविद्यालय, ईरान) ने बताया कि विधुत ऊर्जा बैटरी के आलावा और विभिनं प्रकार के स्रोतो जैसे कि संपीड़ित हवा, संपीड़ित गैस, पानी का भंडारण इत्यादि के रूप में एकत्रित किया जा सकता है। जिन्हें आवशयकता पड़ने पर फिर से विद्युत आपूर्ति के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। विद्युत भंडारण के ये साधन पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपोमार्ट में आयोजित भारत शिक्षा एक्सपो 2026 में बेथनी कान्वेंट स्कूल, डेल्टा-2…
ग्रेटर नोएडा। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय की विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पाण्डेय…
ग्रेटर नोएडा। Delhi World Public School ने सीबीएसई कक्षा XII बोर्ड परीक्षा 2025–26 में विद्यार्थियों…
प्रयागराज, 12 मई। उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक-संपन्न बनाने की…
ग्रेटर नोएडा,12 मई। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल…
ग्रेटर नोएडा। जीएनआईओटी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज द्वारा पीजीडीएम बैच 2024–26 के विद्यार्थियों के लिए…