ग्रेटर नोएडा, 22 अगस्त। स्पर्श ग्लोबल स्कूल, ग्रेटर नोएडा (वेस्ट) में शनिवार को ‘मंथन– The Human Edge in an AI-Driven World’ विषय पर एक विशेष एवं विचारोत्तेजक सत्र का आयोजन किया गया। स्पर्श ग्लोबल स्कूल एवं स्पर्श यूनिवर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक न्यूरोसाइंस के संगम के माध्यम से AI के दौर में मानवीय क्षमताओं, संवेदनाओं और विवेक की प्रासंगिकता पर सार्थक विमर्श हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लॉर्ड स्वर्ण प्रीत सिंह, प्रोफेसर ऑफ सोशल एंड कम्युनिटी साइकियाट्री, यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक, यूके, ने मानव मस्तिष्क, सामाजिक व्यवहार और मानवीय संभावनाओं के विविध आयामों पर विचार साझा किए। उन्होंने तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना के संतुलन को आवश्यक बताया।

मुख्य अतिथि अमीश देवगन, मैनेजिंग एडिटर, न्यूज़18 हिंदी, ने बदलते मीडिया परिदृश्य, AI और संचार के क्षेत्र में तथ्यपरक, विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार सोच के महत्व पर विद्यार्थियों से संवाद किया। प्रसिद्ध फिल्ममेकर नीरू खेरा की उपस्थिति ने कार्यक्रम में कला, सिनेमा, रचनात्मकता और मानवीय संवेदनाओं का विशिष्ट आयाम जोड़ा। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा विद्यार्थियों और अतिथियों के बीच जीवंत संवाद। विद्यार्थियों ने AI, शिक्षा, मीडिया, सिनेमा, रचनात्मकता और भविष्य से जुड़े प्रश्न पूछे तथा विशेषज्ञों के अनुभवों से प्रत्यक्ष रूप से सीखने का अवसर प्राप्त किया। विमर्श का केंद्रीय प्रश्न रहा—“जब AI लगातार अधिक सक्षम हो रही है, तब मनुष्य की सबसे बड़ी विशिष्टता क्या है?” चर्चा में सहानुभूति, रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक विवेक और मानवीय जुड़ाव को मानव की विशिष्ट शक्तियों के रूप में रेखांकित किया गया। ‘मंथन’ ने प्रभावी संदेश दिया कि AI मानव का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं का विस्तार करने वाला माध्यम है। तकनीक भविष्य को गति दे सकती है, लेकिन उसे सही दिशा देने के लिए मानवीय विवेक, संवेदना और मूल्य सदैव आवश्यक रहेंगे।

यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, संवाद और आत्मचिंतन का प्रेरक मंच बना और उन्हें अपनी ‘Human Edge’—मानवीय विशिष्टता—को पहचानने तथा भविष्य को संवेदनशील, रचनात्मक और विवेकपूर्ण दृष्टि से गढ़ने के लिए प्रेरित किया। स्पर्श ग्लोबल स्कूल का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, संवाद और आत्मचिंतन का एक प्रेरक मंच सिद्ध हुआ। ‘मंथन’ ने उन्हें बदलती तकनीकी दुनिया में अपनी ‘Human Edge’—मानवीय विशिष्टता—को पहचानने, विकसित करने और भविष्य को संवेदनशील एवं विवेकपूर्ण दृष्टि से देखने की प्रेरणा दी।





