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फोर्टिस हास्पिटल में केन्या के 67-वर्षीय मरीज का ड्यूल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर प्रत्यारोपण से सफल उपचार

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-ड्यूल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी है जो हृदय के दोनों चैंबरों की सामान्य धड़कन/गति बहाल करने में है सक्षम

ग्रेटर नोएडा।  फोर्टिस हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा ने केन्या से इलाज के लिए आए 67-वर्षीय मरीज के हृदय में ड्यूल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर प्रत्योरोपित कर (जो कि अस्पताल में अपनी किस्म का पहला मामला है) उनका सफल उपचार किया है। मरीज पूर्ण हार्ट ब्लॉक की परेशानी से जूझ रहे थे। इस उन्नत और मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया ने क्षेत्र में हृदय रोगों के उपचार को एक कदम और आगे बढ़ाया है। डॉ हरनीश सिंह भाटिया, कंसल्टेंट- कार्डियोलॉजी, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने इस जटिल और मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया को पूरा किया और मरीज की सामान्य हृदय गति बहाल कर उनकी जल्द से जल्द रिकवरी को भी सुनिश्चित किया।

मरीज को पिछले कई महीनों से बार-बार बेहोशी आने, काफी अधिक थकानग्रस्त होने और चक्कर आने की शिकायत थी। फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में जांच के बाद पाया गया कि उनका हृदय पूरी तरह से ब्लॉक (अवरुद्ध) था, यह ऐसी गंभीर कंडीशन है जिसमें हृदय के ऊपरी और निचले चैंबर्स के बीच इलेक्ट्रिकल सिग्नल पूरी तरह से बाधित हो जाते हैं। उनकी हृदय गति भी खतरनाक ढंग से धीमी पायी गई थी (लगभग 30 -40 धड़कन प्रति मिनट), जिसके कारण मरीज बार-बार बेहोश हो जाया करते थे और अन्य जटिलताओं के कारण मृत्यु की भी आशंका बनी हुई थी। मरीज की विस्तृत जांच के बाद, मेडिकल टीम ने ड्यूल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर को प्रत्यारोपित करने की सलाह उन्हें दी जो कि हृदय गति के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नवीनतम इनोवेशन है। पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में, जिसमें मरीज के सीने में सर्जरी कर पेसमेकर लगाया जाता है और इसकी तारों को नसों से गुजारा जाता है, इस एडवांस सिस्टम में केवल दो छोटे आकार की डिवाइसों को सीधे हृदय में प्रत्यारोपित किया जाता है। एक को दाएं एट्रियम और दूसरे को दाएं वेंट्रिकल में लगाया जाता है। ये डिवाइस हृदय की धड़कनों को सिंक्रोनाइज़ करने के लिए वायरलैस तरीके से आपस में तालमेल कायम करती हैं।  इस मामले की और जानकारी देते हुए, डॉ हरनीश सिंह भाटिया, कंसल्टेंट – कार्डियोलॉजी, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, “हालांकि पूर्ण रूप से हार्ट ब्लॉक होने की कंडीशन का उपचार किया जा सकता है, लेकिन इसमें काफी गंभीर चुनौतियां भी होती हैं, और मरीज के बार-बार बेहोश होने, बुरी तरह से थकानग्रस्त होने, कार्डियाक अरेस्ट और यहां तक कि समय पर सही उपचार न मिलने पर अचानक मृत्यु तक की आशंका बनी रहती है। इस मामले में, मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया को फीमर (जांघ) की नस से कैथेटर के माध्यम से किया गया जिससे सीने में चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं रह गई। यह पूरी प्रक्रिया लगभग दो घंटे में हो गई और दोनों डिवाइसों को सही जगह पर स्थिर तरीके से लगाया गया। मरीज का रिस्पॉन्स बेहतर रहा और उनकी सामान्य हृदयगति को बहाल किया जा सका तथा बिना किसी परेशानी के रिकवरी भी होने लगी है। अगले ही दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। ड्यूल-लीडलैस पेसमेकर टेक्नोलॉजी मरीजों का मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया से उपचार करने में मददगार होती है और यह पारंपरिक पेसमेकर से जुड़ी कई दीर्घकालिक जटिलताओं से भी बचाती है।

सिद्धार्थ निगम, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, “यह देखकर गर्व की अनुभूति होती है कि मरीज अपने इलाज के लिए कई देशों और महाद्वीपों से लंबा सफर कर हमारे देश में इलाज के लिए आते हैं। इस मामले ने फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में हमारी कार्डियोलॉजी टीम की योग्यता और उनकी दक्षता को एक बार फिर साबित किया है। इस उपलब्धि ने अत्याधुनिक, मिलीमैली कार्डियाक टेक्नोलॉजी की सुविधाओं को मरीजों के लिए उपलब्ध कराने की फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा की प्रतिबद्धता दर्शायी है, और भारत में एडवांस हार्ट केयर की अग्रणी मंजिल के तौर पर हमारी प्रतिष्ठा भी बढ़ायी है।

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